नया बदायूं, संवाददाता। (राज्य ब्यूरो)
आजादी के बाद से एक ही मुद्दा के सहारे 30 साल तक कांग्रेस-सपा और भाजपा की राजनीति चली लेकिन आखिरकार भाजपा सरकार में बदायूं से दिल्ली के लिए ट्रैक पर ट्रेन की सेवा जनता को मिल सकी। भाजपा की सरकार में भी सपा के सांसद आदित्य यादव और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा बदायूं से दिल्ले के लिए ट्रेन सेवा दिलाने के लिए मांग करते रहे। बीते दिन बदायूं से दिल्ली के लिए इंटरसिटी ट्रेन भी चल गई। मगर श्रेय लेने की होड़ में दिल्ली के ट्रैक पर जाकर भाजपा और सपा ही नहीं भिड़ी बल्कि बदायूं की राजनीति टकरा गई है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा को सपा के सांसद ने खुली चेतावनी दे डाली है।
इतना ही गुमान है, तो चुनावी मैदान में उतरिए….एक दिन में भ्रम साफ कर देगी जनता
मंगलवार को संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की जंयती का अवसर रहा। जिस पर बदायूं के अलग-अलग कार्यक्रम में शामिल हुए सपा के बदायूं लोकसभा सांसद आदित्य यादव के सामने इंटरसिटी ट्रेन बदायूं से दिल्ली के श्रेय का मुद्दा उठ गया। क्योंकि बीते दिन दिल्ली को ट्रेन को झंडी दिखाने के दौरान केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने सपा सांसद सहित सैफई परिवार को चेतावनी दी थी। इस पर सपा सांसद आदित्य यादव ने अपने सोशल एकाउंट पर लिखकर केंद्रीय मंत्री को चेतावनी दी है, पोस्ट में कहा कि बाबा साहब ने कहा था, अधिकार छीने जाते हैं, भीख में नहीं मिलते। बदायूं की इंटरसिटी ट्रेन जनता के संघर्ष की जीत है, किसी मंत्री की खैरात नहीं है। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा जनता के काम का ‘क्रेडिट’ लूटने में तो आप अव्वल हैं, लेकिन बदायूं की इन नाकामियों का ‘श्रेय’ कौन लेगा?। कहा कि मेडिकल कॉलेज की बदहाली और एचपीसीएल प्लांट में दो अधिकारियों की हत्याएं, जिले की चरमराई कानून व्यवस्था का कौन जिम्मेदार है और कौन श्रेय लेगा। कहा कि 10 साल की सरकार और 6 साल की सांसदी के बाद भी झोली खाली है, इसलिए दूसरों के काम पर अपनी मुहर लगा रहे हैं। अगर लोकप्रियता का इतना ही गुमान है, तो चुनावी मैदान में उतरिए-बदायूं की मिट्टी और बाबा साहब के दिए वोट की चोट आपका भ्रम एक दिन में साफ कर देगी। चेतावनी देते हुए कहा कि अब ‘श्रेय’ का नहीं, ‘हिसाब’ का वक्त है। इधर बिसौली के कार्यक्रम में पहुंचे सपा के सांसद आदित्य यादव ने कहा कि बीएल वर्मा उम्र व राजनीतिक अहोदा में बड़े हैं लेकिन उनके अंदर हल्कापन ज्यादा है। बच्चों की तरह हर कार्य में श्रेय लेने की जिद करते हैं। कहा कि उनके मन में कहीं न कहीं कुंठा है क्योंकि वह पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष की लाइन में भी थे लेकिन पता नहीं किसने लाइन से बाहर कर दिया जिसकी कुंठा दिखा रहे हैं। कहा कि जमीनी नेता बनने में और जमीन पर कब्जा करने में बहुत बड़ा अंतर है। चुनौती दे डाली कि अगर इतने ही बड़े नेता हैं तो छोड़िए सांसदी, छोड़िए विधायकी, जिला पंचायत का चुनाव लड़कर देखिए जमीनी हकीकत पता चल जायेगी। सपा सांसद के इन तीखे सवालों से बदायूं के राजनीति में भूचाल आ गया है।

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