बदायूं संवाददाता।
शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होंगे। नवरात्र की तिथियों और शुभ योगों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. राजेश कुमार शर्मा, मणिनाथ धाम, नाथ नगरी बरेली के अनुसार, इस बार माता का आगमन हाथी यानी गज पर होने की मान्यता है। धार्मिक परंपराओं में हाथी पर माता का आगमन सुख-समृद्धि, खुशहाली और उन्नति का प्रतीक माना जाता है।
गजकेसरी योग सहित बनेंगे कई शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य पं. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस वर्ष शारदीय नवरात्र में गजकेसरी योग के साथ शश राजयोग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत योग तथा गुरु और सूर्य के शुभ संयोग की चर्चा है। उनके अनुसार, इन योगों के कारण इस बार नवरात्र का विशेष ज्योतिषीय महत्व है। उन्होंने गजकेसरी योग को समृद्धि, प्रतिष्ठा और सकारात्मक परिणामों से जुड़ा शुभ योग बताया।
हाथी पर आगमन, मुर्गे पर विदाई की मान्यता
पं. राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार मां भगवती का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में गज पर माता का आगमन शुभ संकेत माना जाता है। वहीं, माता का गमन मुर्गे पर होने की मान्यता बताई जा रही है, जिसे पारंपरिक मान्यताओं में अशांति से जोड़कर देखा जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से प्रारंभ होकर रात्रि 9:32 बजे तक रहने की गणना बताई गई है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए प्रातः 6:17 बजे से 10:10 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा।
श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ नौ दिवसीय साधना का संकल्प लेंगे।
18 अक्टूबर को महाअष्टमी का व्रत
इस वर्ष महाअष्टमी के व्रत को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह रहेगा। दी गई ज्योतिषीय गणना के अनुसार, महाअष्टमी का व्रत 18 अक्टूबर को रखा जाएगा। इसी दिन निशा पूजा भी की जाएगी।
अष्टमी तिथि की अवधि बढ़ने के कारण इसका प्रभाव दो दिनों तक रहने की बात कही गई है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को सुबह 7:55 बजे के बाद पारण कर सकेंगे।
19 अक्टूबर को कन्या पूजन
नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दौरान छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन कराकर उपहार एवं दक्षिणा भेंट की जाती है।
दी गई जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर को सुबह 10:32 बजे के बाद कन्या पूजन किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त 20 अक्टूबर को सुबह 9:32 बजे तक भी कन्या पूजन किया जा सकता है।
20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा समापन
शारदीय नवरात्र का समापन विजयादशमी के पर्व के साथ होगा। दी गई गणना के अनुसार, 20 अक्टूबर को नवमी तिथि के बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी। दोपहर के समय श्रवण नक्षत्र से युक्त दशमी मिलने के कारण इसी दिन विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशभर में दशहरा पर्व मनाया जाता है।

Discussion about this post