नया बदायूं, संवाददाता।
उत्तर प्रदेश के बदायूं में समाजवादी पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष व सपा सांसद आदित्य यादव के करीबी रचित गुप्ता को जीएसटी टीम ने जेल भेज दिया है। रचित गुप्ता राजनीति की आड़ में अवैध कारोबार कर रहे थे। वह जीएसटी चोरी के साथ ही नकली गुटखा बना रहे थे, इस मामले में जीएसटी टीम ने तीन दिनों तक जांच पड़ताल की और फिर पूछताछ की। जिसके बाद सपा नेता रचित गुप्ता सहित को जेल भेज दिया गया है।

समाजवादी पार्टी के जिला कोषाध्यक्ष और कारोबारी रचित गुप्ता के बदायूं स्थित जीएसटी विभाग की टीम ने 12 घंटे तक मैराथन छापेमारी की। यह कार्रवाई बदायूं में अवैध रूप से संचालित की जा रही पान मसाला और गुटखा फैक्ट्री के जरिये 218 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में की गई है। जीएसटी की टीम रचित गुप्ता और उनके दो साथियों मनोज साहू व उमेश को गिरफ्तार कर मेरठ लाई, जहां कोर्ट में पेशी के बाद तीनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस संबंध में गौतमबुद्धनगर में मुकदमा दर्ज कराया गया था। दिल्ली, नोएडा और मेरठ के अधिकारियों की संयुक्त टीम मंगलवार रात 11 बजे रचित गुप्ता के बदायूं स्थित दातागंज आवास और ठिकानों पर पहुंची। स्थानीय पुलिस की सुरक्षा के बीच टीम ने कंप्यूटर रिकार्ड, कर संबंधी फाइलें और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख खंगाले।

अवैध रूप से संचालित थीं 12 मशीनें
जांच में सामने आया कि रचित गुप्ता के प्रबंधन और नियंत्रण में गुटखा पाउच बनाने वाली 12 एफएफएस मशीनें अवैध रू प से चल रही थीं, जिन्हें मनोज साहू और उमेश संचालित करते थे। फरवरी से जून 2026 के बीच बिना किसी पंजीकरण और सरकार को सूचित किए इन मशीनों का संचालन कर करीब 218 करोड़ रु पये के राजस्व की हानि पहुंचाई गई।
जीएसटी टीम ने नामचीन गुटखा किये बरामद
मौके से टीम को 410 किलो कटी हुई सुपारी सहित गगन, शिखर, गोल्ड मोहर और दिलबाग ब्रांड का भारी मात्रा में तैयार माल और पाउच बरामद हुए हैं। आरोपितों के खिलाफ हेल्थ सिक्योरिटी एंड नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। रचित गुप्ता मुख्य रू प से पान मसाला और पेट्रोल पंप के बड़े कारोबारी हैं।
आठ दिन पहले मिला सपा कोषाध्यक्ष का पद
आठ दिन पहले ही उन्हें सपा का जिला कोषाध्यक्ष बनाया गया था। वह सपा मुखिया के चाचा शिवपाल सिंह यादव और बदायूं के सांसद आदित्य यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। इससे पहले रचित गुप्ता दातागंज विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी नजदीकियां सैफई परिवार से बढ़ीं और उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।

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