नया बदायूं, संवाददाता।
बरेली स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाने के मामले में कार्रवाई के बाद सोमवार को दिल्ली क्राइम ब्रांच की छह सदस्यीय टीम बदायूं पहुंची। टीम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में करीब छह घंटे तक अधिकारियों, डॉक्टरों और कर्मचारियों से पूछताछ की तथा उनके बयान दर्ज किए। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में पूरे दिन हड़कंप की स्थिति बनी रही।
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम सोमवार दोपहर करीब एक बजे बदायूं सीएमओ कार्यालय पहुंची। टीम के पहुंचने के बाद शुरुआत में कार्यालय के कई कर्मचारियों को भी इसकी जानकारी नहीं हो सकी कि कौन सी टीम जांच के लिए आई है। दोपहर बाद जब टीम की मौजूदगी की जानकारी फैली तो कार्यालय में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। कोई इसे एंटी करप्शन टीम बता रहा था तो कोई विजिलेंस की कार्रवाई की चर्चा करता नजर आया। बाद में स्पष्ट हुआ कि दिल्ली क्राइम ब्रांच टीम बरेली में सामने आए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले की जांच के सिलसिले में बदायूं पहुंची है।
सीएमओ डॉ. विकास शर्मा की मौजूदगी में क्राइम ब्रांच टीम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। टीम का नेतृत्व विनीत चौधरी कर रहे थे। पूछताछ के दौरान दिव्यांग बोर्ड से जुड़े चिकित्सकों और कर्मचारियों से प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया तथा पूर्व में किए गए कार्यों से संबंधित जानकारी ली गई।
दिव्यांग बोर्ड से जुड़े डॉक्टरों और कर्मचारियों से पूछताछ
क्राइम ब्रांच ने दिव्यांग बोर्ड का कार्य देख चुके पूर्व लिपिक शेर सिंह सोलंकी, वर्तमान में पटल परिवर्तन के बाद दिव्यांग बोर्ड का कार्य देख रहे हरीश कुमार से पूछताछ की।
इसके बाद दिव्यांग बोर्ड से जुड़े चिकित्सकों को भी बुलाया गया। इनमें ईएनटी सर्जन डॉ. एमए सिद्दीकी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रियाज हुसैन, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष मोहन अग्रवाल और नोडल अधिकारी सहित अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की गई। टीम ने करीब छह घंटे तक अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी जुटाई और बयान दर्ज किए।
महिला अस्पताल में भी दिखी हलचल
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई का असर महिला अस्पताल से लेकर सीएमओ कार्यालय तक दिखाई दिया। दिल्ली नंबर की एक गाड़ी महिला अस्पताल स्थित सीएमएस कार्यालय के गेट के पास काफी देर तक खड़ी रही, जबकि दूसरी गाड़ी सीएमओ कार्यालय परिसर में मौजूद रही। दिल्ली नंबर की गाड़ियों को देखकर अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
पूछताछ पूरी करने के बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम शाम करीब साढ़े छह बजे बदायूं से रवाना हो गई। हालांकि टीम की ओर से कार्रवाई को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बरेली से गिरफ्तार कर्मचारी को भी साथ लाई थी टीम
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम बरेली स्वास्थ्य विभाग में गिरफ्तार आउटसोर्सिंग डेटा एंट्री ऑपरेटर कुलदीप सक्सेना को भी अपने साथ लेकर बदायूं पहुंची थी। बताया जा रहा है कि बरेली में फर्जी प्रमाण पत्र से जुड़े मामले की जांच के दौरान बदायूं से जुड़े कुछ तथ्य सामने आने के बाद टीम ने यहां संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और चिकित्सकों से पूछताछ की।
बरेली में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले से जुड़े हैं तार
बरेली में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पहले ही कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग में तैनात आउटसोर्सिंग डेटा एंट्री ऑपरेटर कुलदीप सक्सेना को गिरफ्तार किया गया है। मामला दिल्ली के मौरिस नगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे से जुड़ा बताया जा रहा है।
बताया गया है कि नौकरी पाने के लिए एक युवक द्वारा बरेली से जारी फर्जी मूक-बधिर प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर प्रमाण पत्र तैयार किए जाने के स्रोत और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई। इसी क्रम में बदायूं में भी जांच की गई।
डॉक्टर और बाबू की भूमिका की भी जांच
क्राइम ब्रांच की करीब छह घंटे चली पूछताछ के बाद स्वास्थ्य विभाग में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान एक पूर्व पटल प्रभारी कर्मचारी और दिव्यांग बोर्ड से जुड़े एक डॉक्टर के बयानों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। हालांकि इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच टीम ने किन बिंदुओं पर पूछताछ की और आगे क्या कार्रवाई होगी, यह क्राइम ब्रांच की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कई लोगों को फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी मिलने की भी जांच
फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले की जांच केवल प्रमाण पत्र बनाने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इन प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया और इनके आधार पर कितने लोगों ने नौकरी या अन्य सरकारी लाभ हासिल किए। यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाते हैं तो उनसे जुड़े लाभार्थियों और प्रमाण पत्र तैयार करने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सीएमओ बोले- जांच में पूरा सहयोग किया गया
दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम के बदायूं पहुंचने के संबंध में सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि विनीत चौधरी के नेतृत्व में दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम आई थी। उन्होंने बताया कि बरेली में कुलदीप नामक कर्मचारी की गिरफ्तारी और फर्जी प्रमाण पत्रों से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में टीम ने बदायूं में पूछताछ की।
सीएमओ के अनुसार, क्राइम ब्रांच टीम ने जिन लोगों से जानकारी मांगी, स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूरा सहयोग किया गया और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल बदायूं में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का कोई मामला सामने नहीं आया है।
अब दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर सभी की निगाहें टिकी हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि बरेली में सामने आए फर्जी प्रमाण पत्र प्रकरण के तार बदायूं से किस स्तर तक जुड़े हैं और इस मामले में आगे किसके खिलाफ कार्रवाई होती है।

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