बदायूं संवाददाता।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने उझानी मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसानों की दुर्दशा और लगातार लग रहे जाम पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन की यातायात व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। मंडी में अव्यवस्थाओं और किसानों की समस्याओं का जिम्मेदार आखिर कौन है? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसानों के साथ हो रही दुर्दशा का जवाब समय आने पर ब्याज सहित दिया जाएगा।
राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि उझानी की धान मंडी में बदायूं जनपद के कई ब्लॉकों के किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा कासगंज, फर्रुखाबाद और शाहजहांपुर सहित दूसरे जनपदों के किसान भी यहां धान बेचने आते हैं। इतनी बड़ी मंडी में किसानों की आवाजाही के बावजूद यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई देते। इसके कारण किसानों को मंडी तक पहुंचने और अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंडी में जाम से किसान और राहगीर परेशान
भाकियू टिकैत के मंडल प्रवक्ता ने कहा कि धान का सीजन होने के कारण उझानी मंडी में किसानों और वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस-प्रशासन को पहले से ही यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। लेकिन जाम की समस्या के चलते किसानों के साथ-साथ आम राहगीरों को भी परेशान होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मंडी के आसपास लगने वाला जाम केवल स्थानीय लोगों की समस्या नहीं है, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। मथुरा, एटा, आगरा और अलीगढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों को कई-कई घंटे तक जाम में फंसे रहना पड़ता है। इससे उनका समय बर्बाद होता है और यात्रा भी प्रभावित होती है।
राजेश कुमार सक्सेना ने पुलिस-प्रशासन से सवाल किया कि जब उझानी मंडी में हर साल बड़ी संख्या में किसान धान बेचने आते हैं, तो यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? उन्होंने मांग की कि मंडी के आसपास यातायात प्रबंधन मजबूत किया जाए, वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित की जाए और किसानों तथा राहगीरों को जाम से राहत दिलाई जाए।
गेहूं और बाजरा के समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार को घेरा
मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने गेहूं और बाजरा के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महंगाई के मौजूदा दौर में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को मिलने वाले समर्थन मूल्य में होने वाली बढ़ोतरी उनकी लागत और आर्थिक जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने डीजल, कृषि यंत्रों से जुड़ी लागत, माल ढुलाई, रासायनिक खाद और बिजली की दरों का उल्लेख करते हुए कहा कि खेती करना लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी लागत निकालने के साथ परिवार का भरण-पोषण भी कर सकें।
उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि किसानों की आय और सम्मान की बात करने वाली सरकार को उनकी वास्तविक समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। किसानों की लागत में बढ़ोतरी के अनुपात में समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि नहीं होने से किसानों में असंतोष है।
‘क्या यही है किसानों का सम्मान?’
राजेश कुमार सक्सेना ने समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी पर सवाल उठाते हुए कहा, “मोदी जी, क्या यही किसानों का सम्मान है? महंगाई के दौर में डीजल, खाद, बिजली और किराये का खर्च बढ़ रहा है, जबकि समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोतरी करके किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं। उनके मुताबिक, किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाना और खेती की बढ़ती लागत से राहत देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
चुनाव में जवाब देने की कही बात
भाकियू टिकैत के मंडल प्रवक्ता ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी मेहनत से देश का पेट भरता है, लेकिन जब उसकी उपज बेचने की बारी आती है तो उसे मंडियों में अव्यवस्थाओं, जाम और उचित मूल्य जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के हितों की अनदेखी का जवाब आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ हुए अन्याय और उनकी समस्याओं को किसान यूनियन लगातार उठाती रहेगी।
इस दौरान पूर्व फौजी रमेश चंद्र सिंह, ज्ञान शंकर यजुर्वेदी, चंद्र मोहन वर्मा, पूरनलाल पाली, शिवदयाल सागर, चंद्रकेश यादव सहित कई दर्जन लोग मौजूद रहे।

Discussion about this post