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बदायूं एनकाउंटर मामले की मजिस्ट्रेट व वैज्ञानिक जांच शुरू, एसपी सिटी समेत तीन अधिकारियों की सरकारी पिस्टलें सील

Naya Badaun by Naya Badaun
July 3, 2026
बदायूं एनकाउंटर मामले की मजिस्ट्रेट व वैज्ञानिक जांच शुरू, एसपी सिटी समेत तीन अधिकारियों की सरकारी पिस्टलें सील
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नया बदायूं, संवाददाता।

उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद में एक जुलाई की रात को पुलिस और बदमाश की मुठभेड़ हुई जिसमें बदमाश की मौत हो गई। यह एनकाउंटर बदायूं से लेकर उत्तर प्रदेश घर में चर्चा का विषय बना हुआ है। एनकाउंटर पर सवाल खड़े होते ही पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। डकैत के एनकाउंटर में पुलिस के द्वारा इस्तेमाल किए गए असलाह एवं बदमाश के द्वारा इस्तेमाल किए गए असलाह वैज्ञानिक जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। एसपी सिटी सहित तीन अधिकारियों की सरकारी पिस्टल कैसे प्रॉपर्टी बनाते हुए वैज्ञानिक जांच के लिए भेजी जा रही है। जिनको सील कर दिया गया है वहीं डीएम की ओर से इस एनकाउंटर मामले में मजिस्ट्रेट जांच शुरू कर दी गई है।

एसपी सिटी सहित तीन अधिकारियों की पिस्टल सील

बदायूं में एक लाख रुपये के इनामी डकैत जितेंद्र उर्फ ढालू के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के मामले की जांच अब वैज्ञानिक स्तर पर शुरू हो गई है। मुठभेड़ में जवाबी फायरिंग करने वाले एसपी सिटी अभिषेक सिंह, सिविल लाइंस इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह और सहसवान इंस्पेक्टर धनंजय सिंह की सरकारी पिस्टलों को केस प्रॉपर्टी बनाकर सील कर दिया गया है। इन हथियारों को आरोपी से बरामद असलाह के साथ फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजा जाएगा, जहां बैलिस्टिक विशेषज्ञ प्रत्येक फायरिंग का वैज्ञानिक परीक्षण करेंगे।

हथियार के खोखा की भी होगी जांच
पुलिस ने मुठभेड़ स्थल से बरामद सभी हथियार, खोखे, कारतूस और अन्य भौतिक साक्ष्यों को विधिवत सील कर सुरक्षित कर लिया है। अब एफएसएल में बैलिस्टिक जांच के माध्यम से यह निर्धारित किया जाएगा कि घटनास्थल से मिले खोखे किन-किन हथियारों से फायर हुए और किस हथियार से कितनी गोलियां चलाई गईं।

एफआईआर में यह दर्ज किया गया है सजरा
पुलिस की एफआईआर के अनुसार, बदमाश जितेंद्र उर्फ ढालू ने पुलिस टीम पर छह राउंड फायरिंग की थी। उसके कब्जे से .32 बोर की सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल, 315 बोर का देशी तमंचा, जिंदा कारतूस और खाली खोखे बरामद किए गए हैं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस टीम ने तीन राउंड फायरिंग की, जिनमें इस्तेमाल हुई तीनों सरकारी पिस्टलों को भी अब साक्ष्य के रूप में सील कर दिया गया है।

एफएसएल की रिपोर्ट विवेचना में होगी शामिल
एफएसएल में हथियारों की बैरल, फायरिंग पिन, कारतूस और घटनास्थल से मिले खोखों का सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए प्रत्येक खोखे का संबंधित हथियार से मिलान किया जाएगा, जिससे मुठभेड़ के घटनाक्रम की पुष्टि हो सके। जांच पूरी होने के बाद एफएसएल अपनी विस्तृत रिपोर्ट विवेचक को सौंपेगी, जो विवेचना और न्यायालय में साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परिजनों का विरोध नहीं आया सामने
गौरतलब है कि बुधवार रात थाना सिविल लाइंस क्षेत्र में पुलिस और डकैत जितेंद्र उर्फ ढालू के बीच हुई मुठभेड़ में आरोपी मारा गया था। पुलिस के अनुसार उसे दो गोलियां लगी थीं। गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के मुताबिक, इस कार्रवाई को लेकर परिजनों की ओर से किसी प्रकार का विरोध दर्ज नहीं कराया गया।

मजिस्ट्रियल जांच, 10 जुलाई तक मांगे गए साक्ष्य व बयान
थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एक लाख रुपये के इनामी बदमाश जितेंद्र उर्फ ढालू की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले में अब मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट बदायूं अवनीश कुमार राय के आदेश पर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए उप जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को जांच अधिकारी नामित किया गया है। जांच का संबंध एक जुलाई 2026 को थाना सिविल लाइन क्षेत्र के ग्राम बहेड़ी के जंगल में हुई पुलिस मुठभेड़ से है, जिसमें जितेंद्र उर्फ ढालू पुत्र ओमवीर निवासी ग्राम जमैटा, थाना बनियाठेर, जनपद संभल तथा मूल निवासी ग्राम बझेड़ा, थाना धौलाना, जनपद हापुड़ की मृत्यु हुई थी।

कार्यालय में आकर दर्ज कर सकते हैं बयान

प्रशासन ने आम जनता से जांच में सहयोग करने की अपील की है। यदि कोई व्यक्ति, जनप्रतिनिधि, सभासद, ग्राम प्रधान, प्रत्यक्षदर्शी अथवा अन्य कोई व्यक्ति इस घटना से संबंधित लिखित या मौखिक बयान, जानकारी, फोटो, वीडियो अथवा अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है, तो वह 10 जुलाई 2026 तक किसी भी कार्य दिवस में प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक उप जिला मजिस्ट्रेट, बदायूं के न्यायालय/कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकता है।

शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
प्रशासन ने बताया कि मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य घटना से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण करना है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। इसलिए जिन लोगों के पास इस घटना से संबंधित कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी या साक्ष्य हों, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

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