नया बदायूं, संवाददाता।
भाजपा की डबल इंजन सरकार ने गांव गांव चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने के लिए जन आरोग्य के मंदिरों को स्थापित किया है। जिस गांव गांव की जनता को प्रथम उपचार मिल सके और स्वस्थ रह सके, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते जन आरोग्य मंदिर पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर लापरवाही कर रहे हैं और कई कई तक गायब रहते हैं। ऐसा ही ताजा मामला उझानी के गांव रौली और बरसुआ का सामने आया है। यहां के ग्रामीण उपचार के लिए भटक रहे हैं और 3 महीने से कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर गायब है, आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर अस्पतालों से गायब रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग साठगांठ के चलते उनका वेतन घर बैठे ही जारी कर रहा है।

उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत बरसुआ और रौली स्थित उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति बदहाल बनी हुई है। यहां उपकेंद्र अक्सर बंद रहते हैं, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते सरकार की योजनाएं धरातल पर फेल साबित हो रही हैं।
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं, जहां मुफ्त परामर्श, जांच, दवाइयां और गर्भवती महिलाओं की देखभाल की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन इन केंद्रों पर अक्सर ताले लटके रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां तैनात कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) भी नियमित रूप से अनुपस्थित रहते हैं, जिससे लोगों को उपचार के लिए उझानी तक जाना पड़ता है।
बरसुआ उप स्वास्थ्य केंद्र पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर देवेश तैनात है, यहां केंद्र पर ताला मीना से लटक रहा है और वह नहीं जाते हैं जिसकी वजह से गंदगी का अंबार लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र पर असामाजिक तत्वों ने कब्जा जमा लिया है और इसे शराबियों का अड्डा बना दिया गया है। इससे आसपास के वातावरण में गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।
इसी ब्लॉक के गांव रौली पर पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर सनी तैनात है वह पिछले 3 महीने से केंद्र पर नहीं आए हैं और ग्रामीणों में आक्रोश है उनका उपचार नहीं मिल रहा है। ग्रामीण हरकेश (रौली) ने बताया कि दो-तीन माह से डॉक्टर नहीं आ रहे हैं और शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पप्पू (रौली) का कहना है कि तीन महीने से केंद्र नहीं खुला, जिससे दवा के लिए भटकना पड़ रहा है।
झोलाछाप से उपचार लेने को मजबूर
वहीं अवधेश (बरसुआ) ने बताया कि दो माह से कोई चिकित्सक नहीं आया, मजबूरन लोग झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सफाई कार्य के बदले उन्हें अब तक भुगतान नहीं किया गया है। लटूरी (बरसुआ) ने भी केंद्र पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति की पुष्टि की।
जनप्रतिनिधियों से की शिकायत
ग्रामीणों ने इन दोनों केदो की शिकायत विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरीश शाक्य से फोन पर की है इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि दोबारा से शिकायत केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा से की है। ग्रामीण बोले अगर जल्द ही सुनवाई नहीं की गई तो जनप्रतिनिधियों के आवास पर जाकर दरवाजा खटखटाया जाएगा और अपनी समस्या को सुनाया जाएगा।
उझानी चिकित्सा अधीक्षक की सुनिए
उझानी के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र मौर्य का कहना है कि केंद्र बंद होने की अभी शिकायत मिली है कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर केन्द्रों पर क्यों नहीं जा रहे हैं इसकी मुझे जानकारी नहीं है और कहां है इसकी जानकारी भी नहीं है। जानकारी करते हैं और व्यवस्था में सुधार करते हैं लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
नोडल अधिकारी की सुनिए
इस संबंध में आरसीएच नोडल डॉ. राजवीर गंगवार ने बताया कि उन्हें आरोग्य मंदिर के बंद रहने की जानकारी है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ की सुनिए
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विकास शर्मा का कहना है उझानी के दोनों केंद्रों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर गायब रहने की शिकायत मिली है बताया गया है की शिकायत है केंद्र बंद रहते हैं और मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता है। इस मामले में पत्र जारी कर रहे हैं चिकित्सा अधीक्षक को जानी से जवाब मांगा जाएगा। बाकी पूरे प्रकरण की जांच कर कर कार्रवाई की जाएगी।

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