नया बदायूं, संवाददाता।
जनपद में प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने शहर के मालवीय आवास पर धरना स्थल पर पहुंचकर बिसौली व सदर तहसील प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अधिकारियों पर किसानों के हितों की अनदेखी करने, तालाबों पर अवैध कब्जों को संरक्षण देने और रिश्वतखोरी को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
धरना स्थल पर मौजूद किसानों को संबोधित करते हुए राजेश सक्सेना ने कहा कि तहसील बिसौली के ग्राम बगरैन में तालाबों की पैमाइश का कार्य लंबे समय से लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के पास आधुनिक संसाधन और मशीनें होने के बावजूद टीम मौके पर नहीं पहुंच रही है। उनके अनुसार, गांव में 96 बीघा भूमि की पैमाइश कर अलग किया जाना है, जबकि 154 बीघा तालाब की भूमि का भी सही निर्धारण अभी तक नहीं हो पाया है। तालाब की प्रकृति बदलने के कारण वहां अवैध रूप से दर्जनों मकान बना लिए गए हैं और कई बीघा भूमि पर दबंगों का कब्जा है।
किसान नेता ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन तालाबों से अवैध कब्जे नहीं हटाए गए तो किसान संगठन बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन को किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने सदर तहसील के ग्राम मोहम्मदपुर बिहार का एक और मामला उठाते हुए लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए। सक्सेना ने बताया कि एक किसान ने 21 जून को मक्का फसल का पंजीकरण कराया था, लेकिन सत्यापन के नाम पर संबंधित लेखपाल द्वारा 500 की रिश्वत मांगी गई। किसान द्वारा रिश्वत देने से इनकार करने पर आज तक उसका सत्यापन नहीं किया गया, जिससे वह लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि किसानों का उत्पीड़न किस स्तर तक पहुंच चुका है। किसान अपने ही हक के लिए भटकने को मजबूर हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
किसान नेता राजेश कुमार सक्सेना ने दोनों मामलों को लेकर सदर एसडीएम को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने मांग की कि भ्रष्ट लेखपाल के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए और तालाबों से अवैध कब्जा हटाया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय किसान यूनियन प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन छेड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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