नया बदायूं, संवाददाता।
बदायूं जनपद में पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन के बैनर तले जिले के पंचायत सहायकों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पंचायत सहायक विकास भवन एवं कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र हुए, जहां उन्होंने नारेबाजी कर शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया। बाद में डीएम और जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपा गया।
सोमवार को पंचायत सहायकों का कहना है कि वे ग्राम पंचायत सचिवालयों के संचालन, डिजिटल सेवाओं के क्रियान्वयन, ऑनलाइन कार्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मात्र छह हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो वर्तमान महंगाई के दौर में बेहद कम है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर ग्राम पंचायत सचिव के समान 30 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए। यदि यह संभव नहीं है तो कम से कम राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम कुशल मजदूरी के बराबर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा अनुबंध व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली लागू करने, विवाह के बाद महिला पंचायत सहायकों के स्थानांतरण की स्पष्ट नीति बनाने तथा ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी की भर्ती में पंचायत सहायकों को 50 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी उठाई गई।
यह हैं मांग
ज्ञापन में पंचायत सहायकों और उनके परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने, विभागीय पहचान पत्र जारी करने, अलग पंचायत सहायक पोर्टल विकसित करने तथा पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर, इंटरनेट और स्टेशनरी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।
संसाधनों की मांग
प्रदर्शन के दौरान पंचायत सहायकों ने घोषणा की कि एक जून से वे अपने निजी मोबाइल फोन से किसी भी प्रकार का विभागीय कार्य नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जब तक विभाग द्वारा मोबाइल फोन और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक निजी संसाधनों का उपयोग सरकारी कार्यों के लिए नहीं किया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन उपस्थिति के लिए कंप्यूटर आधारित व्यवस्था लागू करने की मांग की गई।
डीपीआरओ ने समझाया
इस मौके पर पहुंचे डीपीआरओ याबर अब्बासी ने पंचायत सहायकों की समस्याओं को सुना और उनकी मांगों को शासन स्तर तक भेजने का आश्वासन दिया। पंचायत सहायकों ने चेतावनी दी कि यदि 15 जून 2026 तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश के सभी 75 जिलों के पंचायत सहायक लखनऊ के ईको गार्डेन में विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे। पंचायत सहायकों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सम्मानजनक मानदेय, बेहतर कार्य व्यवस्था और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर है। अब सभी की निगाहें शासन के फैसले पर टिकी हैं कि पंचायत सहायकों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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