नया बदायूं, संवाददाता।
रोडवेज स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य नूतन रानी के आने के बाद विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यालय में पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने के साथ ही सुबह होने वाली प्रार्थना सभा को भी नई दिशा दी गई है। अब प्रार्थना सभा महज औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन, सकारात्मक सोच और जागरूकता से जोड़ने का माध्यम बन रही है।

विद्यालय में नए सत्र की शुरुआत के साथ ‘नया सत्र, नया सवेरा’ की थीम के तहत प्रार्थना सभा में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सुबह विद्यालय पहुंचने के बाद विद्यार्थी निर्धारित रूप से प्रार्थना सभा में शामिल होते हैं। इस दौरान प्रार्थना के साथ सुविचार, समाचार वाचन और ज्ञानवर्धक जानकारी विद्यार्थियों के सामने रखी जाती है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ ही उन्हें देश-दुनिया की घटनाओं से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हर दिन बच्चों को मिलता है नया विचार
प्रार्थना सभा की खास बात यह है कि इसमें विद्यालय के शिक्षक भी विद्यार्थियों से संवाद करते हैं। शिक्षक बच्चों को हर दिन कोई न कोई नया विचार, प्रेरणादायक प्रसंग या जीवन से जुड़ी उपयोगी सीख बताते हैं। बच्चों को मेहनत, अनुशासन, समय का सदुपयोग, स्वच्छता, ईमानदारी, जिम्मेदारी और लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है।
शिक्षकों का प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन के लिए भी तैयार किया जाए। प्रार्थना सभा में दिए जाने वाले छोटे-छोटे संदेश बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
समाचार वाचन से बढ़ रही जागरूकता
प्रार्थना सभा में समाचार वाचन भी कराया जा रहा है। विद्यार्थी स्वयं समाचार पढ़कर सुनाते हैं, जिससे उनके अंदर मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित हो रहा है। साथ ही उन्हें देश, प्रदेश और दुनिया में होने वाली प्रमुख घटनाओं की जानकारी मिलती है।इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों की भाषा, उच्चारण और प्रस्तुतीकरण क्षमता को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को समाचार पढ़ने के दौरान सही उच्चारण और स्पष्ट बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
पढ़ाई पर भी विशेष जोर
प्रधानाचार्य नूतन रानी के नेतृत्व में विद्यालय में प्रार्थना सभा के साथ-साथ शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, कक्षा में उनकी सहभागिता और विषयों को समझने की क्षमता पर ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षकों को भी बच्चों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार मार्गदर्शन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विद्यालय का उद्देश्य है कि विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय आएं, मन लगाकर पढ़ाई करें और अपनी प्रतिभा को पहचानते हुए आगे बढ़ें। पढ़ाई के साथ अनुशासन और नैतिक मूल्यों को भी विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रार्थना सभा बनी सीखने का मंच
पहले जहां प्रार्थना सभा को केवल प्रार्थना तक सीमित माना जाता था, वहीं अब इसे विद्यार्थियों के लिए सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच बनाया जा रहा है। सुविचार के माध्यम से सकारात्मक सोच विकसित करने, समाचार वाचन से जागरूकता बढ़ाने और शिक्षकों के संबोधन से जीवनोपयोगी ज्ञान देने की कोशिश की जा रही है। विद्यालय के विद्यार्थियों में भी इस बदलाव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। सुबह की सभा में अलग-अलग गतिविधियों में बच्चों की भागीदारी बढ़ रही है। इससे उनमें मंच पर बोलने, अपनी बात रखने और दूसरों के सामने आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति देने की क्षमता विकसित हो रही है।
‘नया सत्र, नया सवेरा’ से नई उम्मीद
विद्यालय में चल रही इस पहल का मूल संदेश ‘नया सत्र, नया सवेरा’ है। इसके जरिए विद्यार्थियों को पुराने अनुभवों से सीख लेकर नए उत्साह के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। शिक्षकों द्वारा बच्चों को बताया जा रहा है कि सफलता के लिए नियमित मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच जरूरी है।
बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम
प्रधानाचार्य नूतन रानी की पहल से विद्यालय की दिनचर्या में प्रार्थना सभा को प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण बनाने का प्रयास किया गया है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि सुबह की शुरुआत यदि सकारात्मक विचारों और अच्छे संदेशों के साथ हो तो इसका प्रभाव पूरे दिन की पढ़ाई और विद्यार्थियों के व्यवहार पर पड़ता है। इस पहल के माध्यम से राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, जागरूकता और व्यक्तित्व विकास को भी महत्व दिया जा रहा है। विद्यालय की यह नई पहल विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।

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