नया बदायूं, संवाददाता मुजरिया।
बदायूं जनपद के मुजरिया थाना क्षेत्र के ग्राम चतुरी नगला स्थित वाल्मीकि बस्ती के रास्ते का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एडीएम प्रशासन को दी गई शिकायत के बाद बुधवार को तहसील प्रशासन, राजस्व टीम और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। टीम ने रास्ते की पैमाइश भी कराई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर बंद रास्ता नहीं खुलवाया गया और केवल आश्वासन देकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।
शनिवार को वाल्मीकि समाज के लोगों के अनुसार, गांव के उमेश पुत्र करण सिंह, पंकज और भानू ने करीब एक माह पहले ट्रैक्टर से लगभग 50 वर्ष पुराने सार्वजनिक रास्ते को जोतकर बंद कर दिया था। इससे बस्ती के लोगों का आवागमन बाधित हो गया है, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में भी आरोपित पक्ष ने उन्हें रास्ते से न निकलने की चेतावनी दी और बीच रास्ते में दीवार खड़ी करने की बात कही। इसके बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
समस्या निपटी नहीं, निस्तारण कर दिया
वाल्मीकि समाज का कहना है कि ग्राम प्रधान पति और तहसील प्रशासन के आश्वासन पर उनसे शिकायत निस्तारण पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए गए, जबकि वास्तविकता में रास्ता अब भी बंद है। इससे बस्ती के लोगों में भारी आक्रोश है। उनका सवाल है कि जब रास्ता खुला ही नहीं, तो शिकायत का निस्तारण किस आधार पर किया गया।
रास्ता खुलवाने की उठाई मांग
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रास्ता जोतने वाले दबंग प्रवृत्ति के हैं। उमेश पर पहले भी गांव में सरकारी खड़ंजा उखाड़ने का आरोप लग चुका है। वाल्मीकि समाज ने प्रशासन से मांग की है कि सार्वजनिक रास्ता तत्काल खुलवाया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
टीम की सुनिए
राजस्व निरीक्षक मंजुल कुमार के नेतृत्व में गठित संयुक्त टीम का कहना है कि चकमार्ग की पैमाइश कर निशानदेही कर दी गई है। ग्राम प्रधान पति को मिट्टी कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि आगे कोई समस्या आती है तो आरोपियों के खिलाफ विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

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