नया बदायूं लखनऊ ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार शाम एक उच्च स्तरीय बैठक में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत उत्तर प्रदेश में हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मिशन शासन व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कर्मचारियों के प्रशिक्षण को उनके प्रमोशन और वार्षिक गोपनीय आख्या से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए।
प्रशिक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश पूरे देश में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश के आंकड़े इसकी सफलता की पुष्टि करते हैं।
पंजीकरण: अब तक 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देश भर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93% है।
कोर्स पूर्णता: प्रदेश में 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर हुई कुल कोर्स पूर्णता का 99% है।
सक्रिय उपयोगकर्ता: 10 लाख से अधिक कर्मचारी कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं।
फील्ड कर्मचारियों और इंजीनियरों पर विशेष ध्यान।
मुख्यमंत्री ने एएनएम, आशा, पुलिस कांस्टेबल, पंचायत और शहरी निकायों जैसे जमीनी स्तर पर कार्यरत फील्ड कर्मचारियों को व्यावहारिक और कार्यात्मक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक ग्राउंड जीरो पर तैनात कर्मी सक्षम नहीं होंगे, तब तक योजनाओं का लाभ जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाएगा। इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई और संचार जैसे तकनीकी विभागों के इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण पैकेज तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपीएएएम को मिली बड़ी जिम्मेदारी।
यूपी एकेडमी ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट (यूपीएएएम) को सभी विभागों के लिए ‘कैपेसिटी बिल्डिंग प्लान’ तैयार करने वाली नोडल संस्था नामित किया गया है। अब सभी विभागों के लिए 7 दिवसीय प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि आधुनिक चुनौतियों को देखते हुए सभी पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

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