नया बदायूं, संवाददाता।
केंद्र सरकार ने नया बजट पेश किया है। जिसमें कुक्कुट विकास नीति के लिए सरकार का विशेष फोकस है और बजट दिया है। जिस तरह से सरकार गंभीर है अगर उसी अनुसार बजट और योजनाएं जिला स्तर पर आ गईं तो कुक्कुट विकास नीति के तहत मुर्गी पालन को बढ़ावा मिल जायेगा। छोटी और बड़ी यूनिट खुल जायेंगी। सबसे ज्यादा फोकस लोगों का छोटी ईकाई संचालित करने पर है।
जिले में केंद्र सरकार के बजट से स्थानीय स्तर पर मुर्गी पालन से जुड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों के चेहरा खिल गये। पशुपालन विभाग के तहत कुक्कुट विकास नीति के तहत उझानी और सहसवान, ककरारा में बड़ी पोल्टी फार्म चल रहा है। जिले में अंडा उत्पादन के लिए कुल 46 छोटे पोल्ट्री फार्म संचालित हैं। इन फार्मों में प्रतिदिन औसतन 500 से 600 अंडों का उत्पादन किया जाता है। इसके अलावा उझानी क्षेत्र में स्थित एक बड़ा पोल्ट्री फार्म जिले की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहा है, जहां प्रतिदिन लगभग 15 हजार अंडों का उत्पादन होता है। अगर सरकार के नये बजट में छोटी-छोटी ईकाइयों को वरियता दी जाती है तो जिले में अंड्डा और मांस का उत्पादन बढ़ेगा वहीं रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।
गैर जनपदों से बढ़ेगा व्यापार
जनपद बदायूं में वर्तमान में कुक्कुट विकास नीति के तहत मुर्गी पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले से रोजाना 15 हजार अंडा का उत्पादन गैर जनपदों आदि जगह जाता है। बावजूद इसके सर्दी के मौसम में अचानक बढ़ी मांग के कारण स्थानीय उत्पादन नाकाफी साबित हो रहा है। अंडों की बढ़ती खपत को देखते हुए अब अलीगढ़, संभल आदि पड़ोसी जिलों से बड़े पैमाने पर अंडों की आपूर्ति की जा रही है। नये बजट में कुछ अनुदान या योजना में नया कुछ होता है तो मुर्गी पालन को बढ़ावा मिलेगा और गैर जनपद जुड़ेंगे और व्यापार बढ़ा जायेगा।
छोटी-छोटी युनिटों में होगा बढ़ावा
जनपद में पोल्टी फार्म बड़े-बड़े तो गिने-चुने ही संचालित हैं। मगर छोटे-छोटे पोल्टी फार्म ज्यादा चल रहे हैं। पिलछे दो-तीन वर्षों में संख्या बढ़ी है। कुक्कुट विकास नीति के तहत छोटी ईकाई की व्यवस्था हो जाये और जिस तरह से सरकार ने नये बजट में कुक्कुट विकास नीति पर फोकस किया है। छोटी ईकाई के लिए अनुदान पर योजना संचालित हो जाये तो और ज्यादा संख्या बढ़ सकती है।
