नया बदायूं

बज्म चराग-ए-सुख़न के मासिक तरही मुशायरे में बही शायरी की बयार 

 

बदायूं संवाददाता|

शहर में साहित्यिक और अदबी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बज्म चराग-ए-सुख़न के तत्वावधान में शुक्रवार की रात मोहल्ला सोथा स्थित फरशोरी मंजिल कार्यालय पर मासिक तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी महफिल के दौरान शायरी के रंग बिखरते रहे और श्रोताओं ने तालियों तथा वाहवाही के साथ शायरों का उत्साहवर्धन किया।

मुशायरे में मशहूर उस्ताद शायर डॉ. मुजाहिद नासिर की मौजूदगी ने आयोजन को खास बना दिया। उनकी सरपरस्ती में सजी इस अदबी महफिल में शायरों ने अपने अशआर के जरिए मोहब्बत, जिंदगी, इंसानी जज्बात और सामाजिक सरोकारों को खूबसूरती से बयां किया। शायरों की दिलकश प्रस्तुतियों ने महफिल में मौजूद लोगों को देर रात तक बांधे रखा।

तरही मुशायरे की परंपरा ने बढ़ाई आयोजन की खूबसूरती

तरही मुशायरा उर्दू अदब की एक खास परंपरा है, जिसमें शायर निर्धारित मिसरे या तय बहर के अनुसार अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हैं। इस परंपरा के माध्यम से शायरों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने और एक-दूसरे के कलाम से साहित्यिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है। बज्म चराग-ए-सुख़न की ओर से आयोजित मासिक मुशायरा भी इसी अदबी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है।

कार्यक्रम में पेश किए गए कलाम ने श्रोताओं को कभी मोहब्बत के एहसास से रूबरू कराया तो कभी जिंदगी की हकीकतों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। शायरों ने अपने शब्दों और अंदाज-ए-बयां से महफिल में समां बांध दिया। श्रोताओं ने पसंदीदा अशआर पर दाद देकर शायरों की हौसला अफजाई की।

उर्दू अदब को आगे बढ़ाने की पहल

बज्म चराग-ए-सुख़न की ओर से आयोजित मासिक तरही मुशायरे साहित्यिक गतिविधियों को जीवंत बनाए रखने और नई प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों से शायरी के प्रति रुचि रखने वाले लोगों को एक मंच मिलता है और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

शुक्रवार रात आयोजित इस मुशायरे में शायरी और अदब का खूबसूरत संगम देखने को मिला। शायरों की प्रस्तुतियों और श्रोताओं की भरपूर दाद के बीच महफिल यादगार बन गई।

Exit mobile version