नई दिल्ली, नेशनल ब्यूरो।
भारत में पदयात्राओं के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का संदेश देने वाली ‘वाटर वुमन’ ने अब मलेशिया की प्रतिष्ठित मलाया यूनिवर्सिटी (Universiti Malaya) में अपने अनुभव साझा किए। लंदन की संसद और जापान के अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के बाद यहां जल संरक्षण की आवाज पहुंचना उनके अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
विश्वविद्यालय में वाटर वुमन ने पदयात्राओं के दौरान जल संरक्षण, पर्यावरण बचाने और जनभागीदारी बढ़ाने के अपने अनुभव साझा किए। शिक्षा विभाग के PRO MADYA डॉ. ABD RAZAK ZAKARIA ने उन्हें विश्वविद्यालय का भ्रमण कराया। इस दौरान अमेरिका से आए प्रोफेसरों ने भी उन्हें अमेरिका पहुंचकर जल संरक्षण अभियान का संदेश देने के लिए आमंत्रित किया।
वाटर वुमन के विचारों और अनुभवों को जानकर विद्यार्थियों में जल संरक्षण तथा पर्यावरण बचाने के अभियान से जुड़ने को लेकर उत्साह दिखाई दिया। संवाद के बाद हजारों विद्यार्थियों ने पंचतत्व संस्था से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सहभागी बनने की इच्छा जताई।
पंचतत्व संस्था का अभियान अब भारत की सीमाओं से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच रहा है। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए युवाओं को जोड़ने की यह पहल पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दे रही है।
वाटर वुमन ने अपने अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया कि जल संरक्षण किसी एक देश तक सीमित विषय नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा जिम्मेदारी है। युवाओं की भागीदारी से ही जल संकट और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

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