बदायूं (सैदपुर): कस्बा सैदपुर में अली डे का पर्व अकीदत और जोश-ओ-खरोश के साथ मनाया गया। मौला अली अलैहिस्सलाम के चाहने वालों ने सुबह से शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी अकीदत का इजहार किया। दिन भर कस्बे में लंगर और महफिलों का सिलसिला चलता रहा, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
रूहानी महफिल और नामचीन फनकार
शाम ढलते ही मोहल्ला खेड़ा सादात स्थित सय्यदों वाले दालान पर अंजुमन सादात कमेटी के तत्वावधान में एक अजीमुश्शान मौला-ए-कायनात कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की निजामत हाफिज रिजवान ने की। महफिल का मुख्य आकर्षण मुरादाबाद से आए मशहूर नातख्वां असद मुरादाबादी रहे, जिन्होंने अपने विशिष्ट मौलाई और हुसैनी अंदाज से समां बांध दिया। उनके साथ ही स्थानीय और बाहरी शायरों—अब्दुल मुस्तफा अली, इमरान सैदपुरी, जहीरुल हसन, अयाज अली, आतिफ सैदपुरी, गुलाम अली, सलाह अली और इक़तिदार अली ने भी बारगाहे अली में अपना कलाम पेश किया। शायरों की बेहतरीन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को इश्क़-ए-अली के नूर से सराबोर कर दिया।
मौला अली की शिक्षाओं पर जोर।
कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए मुख्य वक्ता शहर काजी इमामे ईदगाह हजरत मुफ्ती सैयद वाकिफ अली अशरफी ने हजरत अली की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मौला अली की जिंदगी इल्म,अमल, सादगी, सब्र, बहादुरी और इंसाफ का बेहतरीन संगम है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पैगाम दिया कि समाज की तरक्की और व्यक्तिगत सुधार के लिए मौला अली के नक्शे-कदम पर चलना अनिवार्य है।
अमन-चैन की दुआ के साथ समापन।
कार्यक्रम के समापन पर मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे और उम्मत की भलाई के लिए विशेष दुआ मांगी गई। अली-अली के नारों और रूहानी दुआओं के साथ इस कॉन्फ्रेंस का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस अवसर पर मुख्य रूप से हाफिज रिजवान, हाजी मोहम्मद स्वालेह अली, जहीरुल हसन, और अब्दुल मुस्तफा अली सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।

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