नया बदायूं संवाददाता। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर अपनी मांगों को लेकर अड़ी आशा बहुओं का आंदोलन अब और तेज हो गया है। मालवीय मैदान में जारी धरने के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी और आंदोलन को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प लिया।आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए यूनियन ने 9 जनवरी को मंडलायुक्त कार्यालय पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है।
मुख्य मांगें और सरकार का रुख।
जिलाध्यक्ष जौली वैश्य ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि आशा कर्मी 15 दिसंबर से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार की अनदेखी के कारण यह गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल लंबित भुगतान (2024-25) जारी करने के आदेश से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
कर्मचारी का दर्जा: 45वें और 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू कर आशा कर्मियों को ‘कर्मचारी’ के रूप में वर्गीकृत करना।
वित्तीय सुरक्षा: न्यूनतम वेतन, ग्रेच्युटी, ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) की सुविधा।
अवकाश व सेवा लाभ: मातृत्व अवकाश, राष्ट्रीय एवं त्योहार अवकाश के साथ सेवा पंजिका (Service Book) तैयार करना।
बकाया भुगतान: 2019 से अब तक के बकाया पारिश्रमिक की पूरी अदायगी।
दमनकारी नीतियों से नहीं डरेगा आंदोलन।
यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन और प्रबंधन डराने-धमकाने और दमन के जरिए आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं, जो कभी सफल नहीं होगा। जिला उपाध्यक्ष निर्दोष ने एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि जिला सचिव मुनीषा यादव ने कर्मियों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के बहकावे या धमकी से विचलित न हों।
आगामी रणनीति तैयार 9 जनवरी को करेंगे घेराव।
आंदोलन को और व्यापक बनाने के लिए यूनियन ने 9 जनवरी को मंडलायुक्त कार्यालय पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है।पदाधिकारियों का मानना है कि इस ऐतिहासिक लड़ाई से ही आशा कर्मियों के भविष्य के लिए उम्मीद की खिड़की खुलेगी। इस अवसर पर राजकुमारी ने सभी को निर्भीकता से लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में नीलम, रूपवती, किरण, वीणा चंदेल, अर्चना, छाया, विनय, पम्मी, बसंती, उषा देवी, निर्मला, पूजा, दर्शना सहित बड़ी संख्या में आशा और संगिनी कर्मी उपस्थित रहीं।

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