नया बदायूं

शिक्षक समाज को बेहतर इंसान बनाने की प्रेरणा दें : आबिद रजा

नया बदायूं, संवाददाता।

शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को नगर पालिका परिसर में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया। समारोह में पूर्व मंत्री आबिद रजा मुख्य अतिथि रहे, जबकि पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीनियर प्राचार्य गुलफाम सिंह यादव ने की। आदित्य यादव के प्रतिनिधि अनिल यादव भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व मंत्री आबिद रजा और पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने शिक्षक दिवस के संस्थापक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
मुख्य अतिथि आबिद रजा ने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देना भी है। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की में शिक्षकों का योगदान महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ मानवता, आपसी भाईचारे और संवेदनशीलता का संदेश दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में मजहब और बिरादरी के नाम पर राजनीति के बजाय इंसानियत की राजनीति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। समाज में भाईचारा और सद्भाव मजबूत होगा, तभी देश सही मायने में आगे बढ़ सकेगा।
पालिकाध्यक्ष फात्मा रजा ने कहा कि वह शिक्षकों का बेहद सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसमें शिक्षा और शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षक सम्मान समारोह के आह्वान पर बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षकों का उन्होंने आभार जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान में नगर पालिका की ओर से किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गुलफाम सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था के सामने कई नई चुनौतियां हैं। तकनीकी बदलाव, इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों ने विद्यार्थियों के लिए ज्ञान के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन गलत और भ्रामक जानकारी की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में शिक्षकों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। शिक्षकों को विद्यार्थियों को जानकारी देने के साथ-साथ सही और गलत में अंतर करने तथा विवेक का इस्तेमाल करने के लिए भी तैयार करना चाहिए।
सेवानिवृत्त शिक्षक राजीव राज ने कहा कि भारत की प्राचीन शिक्षा परंपरा बेहद समृद्ध रही है। यहां शिक्षा को केवल रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं माना जाता था, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण विकास से जोड़ा जाता था। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी ऐसे तत्वों को शामिल करने की जरूरत है, जिससे विद्यार्थी ज्ञान के साथ जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकें।
सेवानिवृत्त शिक्षक अनवार उद्दीन ने कहा कि शिक्षक समाज के महत्वपूर्ण वर्गों में शामिल हैं। शिक्षक अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों के भविष्य को संवारने में लगा देते हैं। उनके योगदान का परिणाम तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन वर्षों बाद जब उनके पढ़ाए विद्यार्थी सफलता हासिल करते हैं तो शिक्षक की मेहनत सार्थक होती है।
समारोह में प्रोफेसर कमला माहेश्वरी, जमील, आचार्य प्रताप सिंह, ममता नौगरिया, प्राचार्या सुषमा कथूरिया, पूर्व प्राचार्य खिजर, पूर्व प्राचार्य सुबुर, प्राचार्य गिन्दो देवी, सेवानिवृत्त एचएफ चंद्र, सेवानिवृत्त मजहर शब्बीर, सेवानिवृत्त मोहम्मद मियां, सीमा यादव, शहनाज बानो, कन्हैया लाल, मार्क्स नजम, वेदमित्र आर्य सहित अन्य शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे।

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