नया बदायूं

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026: घर-घर जन्में कृष्ण कन्हाई, मथुरा सहित दुनियाभर में बजी बधाई

नया बदायूं टीम, लखनऊ/मथुरा। राज्य ब्यूरो।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शनिवार की मध्यरात्रि 12 बजते ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव पूरे उत्तर प्रदेश समेत देश-विदेश में धूमधाम से मनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जैसे ही घड़ी की सुइयां रात 12 बजे पर पहुंचीं, पूरा ब्रज ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’ और ‘हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और शंखनाद के बीच भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।


कई घंटे से कान्हा के जन्म का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं की आंखों में खुशी और चेहरे पर उत्साह नजर आया। जन्म के साथ ही मंदिरों में आरती और पूजा-अर्चना शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण को झूला झुलाया और भजन-कीर्तन के साथ जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।
जन्मभूमि मथुरा में उमड़ा आस्था का सैलाब
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में जन्माष्टमी का सबसे बड़ा उत्सव देखने को मिला। जन्मस्थान परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही जन्मस्थान परिसर भक्तों के जयघोष से गूंज उठा। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने मथुरा पहुंचे।

घर-घर जन्मे कृष्ण कन्हाई
मथुरा के साथ ही बदायूं समेत पूरे उत्तर प्रदेश में घरों और मंदिरों में मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। कान्हा के जन्म के समय महिलाओं और बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की। घरों में पालने सजाए गए और कान्हा को पालने में झुलाकर जन्मोत्सव मनाया गया।
रात 12 बजते ही ‘नंद के घर आनंद भयो’ की बधाई गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, फल, मिठाई और अन्य भोग अर्पित किए। इसके बाद प्रसाद वितरण का सिलसिला शुरू हुआ।
मंदिरों में भजन-कीर्तन और रासलीला
मथुरा-वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी पर विशेष आयोजन किए गए। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
जन्मोत्सव के दौरान मंदिरों में आकर्षक विद्युत सजावट की गई। फूलों से मंदिरों को सजाया गया और श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। ब्रज की गलियां और बाजार देर रात तक कृष्ण भक्ति में डूबे रहे।
जन्म के बाद हुआ विशेष अभिषेक और आरती
श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मध्यरात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। जन्म के पावन क्षण के बाद भगवान का महाभिषेक, श्रृंगार और आरती की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।
जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर परिसर में जयकारों की गूंज के बीच भक्तों ने हाथ उठाकर अपने आराध्य का अभिनंदन किया। पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
जन्माष्टमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मथुरा-वृंदावन में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। प्रमुख मंदिरों, बाजारों, मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई। भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए।
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ ही मथुरा से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही स्वर सुनाई दिया—‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की।’ आस्था, भक्ति और उल्लास से सराबोर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को पूरे उत्साह के साथ मनाया।

Exit mobile version