नया बदायूं

रुद्राभिषेक से होता है देवत्व का जागरण : संजीव

नया बदायूं,संवाददाता।

गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र स्थित नर्मदेश्वर महाकाल मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। बच्चों, गायत्री परिजनों एवं श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का विधिविधान से पूजन किया। इस दौरान दुग्ध, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा एवं पुष्प आदि अर्पित किए गए। वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ भजन-कीर्तन हुआ और हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

यज्ञवीर की उपाधि से विभूषित गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि रुद्राभिषेक वैदिक परंपरा में आत्मशुद्धि और लोकमंगल की साधना है। वेदों में रुद्र की स्तुति करते हुए आरोग्य, शांति और कल्याण की कामना की गई है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का वास्तविक अनुदान मनुष्य के भीतर सद्बुद्धि, विवेक, संयम और करुणा का जागरण है। रुद्राभिषेक के माध्यम से मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और विकारों के परिष्कार का संकल्प लेना चाहिए।
परिव्राजक लेखराज जायसवाल ने कहा कि पुराणों में भगवान शिव को आशुतोष और करुणासागर कहा गया है। उनका नीलकंठ स्वरूप त्याग और लोकमंगल की प्रेरणा देता है। भगवान शिव ने विष को धारण कर संसार की रक्षा का संदेश दिया। उनकी जटाओं में विराजमान गंगा पवित्रता, मस्तक का चंद्रमा शीतलता और त्रिनेत्र ज्ञान-विवेक का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिव की उपासना मनुष्य को विषम परिस्थितियों में धैर्य रखने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देती है।
परिव्राजक बृज किशोर तिवारी ने कहा कि वेद, पुराण और उपनिषदों का चिंतन मनुष्य को अपने भीतर छिपे देवत्व को जागृत करने की प्रेरणा देता है। शिव कल्याण के प्रतीक हैं। रुद्राभिषेक में जल, दुग्ध, बिल्व पत्र और पुष्प अर्पित करने के साथ निर्मल विचार, संयमित व्यवहार और सेवा भावना अपनाने का संकल्प लेना चाहिए। जब मनुष्य सत्य, करुणा, संयम, परोपकार और सदाचार को जीवन में उतारता है, तभी उसका जीवन देवतुल्य बनने की दिशा में आगे बढ़ता है।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का पूजन-अर्चन कर परिवार, समाज और राष्ट्र के सुख-शांति एवं कल्याण की कामना की। इस अवसर पर माया सक्सेना, राधिका, संजना, कोमल, अर्चना, नीतू, शैलेश, रौनक, कनक, अनुष्का, पायल, शिखा, पलक, मोहिनी सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।

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