बदायूं संवाददाता।
शारदीय नवरात्रि केवल मां दुर्गा की आराधना और शक्ति उपासना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सद्विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों को अपने जीवन में धारण करने का भी अवसर है। नवरात्रि हमें जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज में सद्भाव बढ़ाने और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करती है। यह विचार गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। वैदिक मंत्रोच्चार और गायत्री महामंत्र की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने मां की आराधना कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की। पूजा-अर्चना के बाद भव्य आरती आयोजित हुई, जिसमें गायत्री परिजनों ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर गायत्री महायज्ञ का आयोजन भी किया गया। यज्ञ भगवान को विशेष आहुतियां समर्पित कर विश्व कल्याण, सुख-शांति, समृद्धि और जनमंगल की कामना की गई। यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण से पूरा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने धर्म, सदाचार और जनसेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
मां चंद्रघंटा की आराधना से मिलता है साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश
परिव्राजक लेखराज जायसवाल और ब्रजकिशोर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। इस दौरान गायत्री परिवार के परिजनों ने श्रद्धापूर्वक आहुतियां अर्पित कीं।
मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्र नाथ शर्मा ने मां चंद्रघंटा की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां चंद्रघंटा की आराधना साहस, पराक्रम और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है। उनकी उपासना से साधकों को निर्भय होकर धर्म और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि में शक्ति की आराधना मनुष्य को अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने और जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से समाज में सदाचार, नैतिकता, सेवा और सद्भाव की भावना को भी मजबूत करना चाहिए।
संस्कारवान समाज के निर्माण का संदेश देती है नवरात्रि
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि नवरात्रि शक्ति उपासना के साथ आत्मशुद्धि और आत्मपरिष्कार का भी महत्वपूर्ण पर्व है। मां दुर्गा की आराधना हमें अपने विचारों को शुद्ध करने, बुराइयों का त्याग करने और श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि समाज में सेवा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए। परिवारों में अच्छे संस्कारों का विकास और नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सद्विचारों और श्रेष्ठ संस्कारों को स्थान देता है, तभी एक स्वस्थ, संस्कारवान और सद्भावपूर्ण समाज का निर्माण संभव होता है।
मुख्य यजमान ने किया मां चंद्रघंटा का पूजन
कार्यक्रम में मुख्य यजमान नरेंद्र पाल शर्मा, ‘आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी’ अभियान की जिला समन्वयक माया सक्सेना और वरिष्ठ ट्रस्टी सुखपाल शर्मा ने मां चंद्रघंटा का विधि-विधान से पूजन किया। श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में श्रद्धा अर्पित कर परिवार और समाज की सुख-शांति एवं कल्याण की प्रार्थना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गायत्री परिजन उपस्थित रहे। वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ और आरती के माध्यम से धार्मिक वातावरण बना रहा। आयोजन का संदेश रहा कि आध्यात्मिक साधना के साथ श्रेष्ठ संस्कारों, नैतिक मूल्यों और जनसेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
