नया बदायूं, संवाददाता।
विद्युत उपकेंद्र कुंवरगांव क्षेत्र के गांव सिगोई में ट्रांसफार्मर से निजी नलकूपों को बिजली आपूर्ति देने और बिना स्वीकृत एस्टीमेट के बिजली पोल लगाए जाने का मामला अब और अधिक विवादों में घिर गया है। जांच टीम के निरीक्षण के बाद ग्रामीणों ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अधीक्षण अभियंता अजय कुमार के निर्देश पर एक्सईएन द्वितीय नागेंद्र कुमार एवं अवर अभियंता (परीक्षण) केके शर्मा शनिवार को जांच के लिए गांव पहुंचे। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर केवल औपचारिकता निभाई और जेई से सांठगांठ कर बिना शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए ही वापस लौट गई।
लो वोल्टेज किल्लत
ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्थापित 63 केवीए के सरकारी ट्रांसफार्मर से चार किसानों के निजी नलकूपों को नियमों के विपरीत बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। आरोप है कि इसके एवज में करीब 40 हजार रुपये की अवैध वसूली भी की गई। साथ ही बिना स्वीकृत एस्टीमेट के दो नए बिजली पोल भी लगा दिए गए, जिससे पूरे गांव में लो-वोल्टेज की समस्या उत्पन्न हो गई और घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही थी।
शिकायत के बाद जांच के आदेश
मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने पर अधीक्षण अभियंता ने जांच के आदेश देते हुए संबंधित अभिलेखों और स्वीकृतियों की जांच कर दो दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
जेई की बजह से हुई घपलेबाजी
जांच से पहले बदली गई व्यवस्था, अनियमितताओं को छिपाने का आरोप ग्रामीणों का आरोप है। कि जांच की सूचना मिलते ही उपकेंद्र कुंवरगांव के जेई चिरोंजी लाल ने पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया। आंधी में क्षतिग्रस्त लाइन के बाद जिन नलकूपों को सरकारी ट्रांसफार्मर से जोड़ा गया था, उन्हें जांच से पहले ही 100 केवीए ट्रांसफार्मर से पुनः जोड़ दिया गया। इसके लिए नए पोल लगाकर लाइन भी खींच दी गई, ताकि मौके पर अनियमितता दिखाई न दे।
जांच में कई बिंदुओं की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि जांच टीम के पहुंचने से पहले ही सरकारी ट्रांसफार्मर से सभी अवैध कनेक्शन हटा दिए गए थे। इसके बावजूद टीम ने बिना स्वीकृत एस्टीमेट के लगाए गए पोलों का निरीक्षण तक नहीं किया। यदि इन बिंदुओं की जांच होती तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती थी।
केवल चार किसानों से पूछताछ, ग्रामीणों के बयान नहीं लिए गए।
जांच में गड़बड़ी
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच टीम ने केवल उन्हीं चार किसानों से पूछताछ की, जिनके नलकूपों पर पहले कनेक्शन जुड़े थे, जबकि अन्य ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज ही नहीं किए गए। इससे पूरी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक्सईएन ने जेई को लगाई फटकार
हालांकि निरीक्षण के दौरान एक्सईएन द्वितीय नागेंद्र कुमार ने मौके की स्थिति देखने के बाद जेई चिरोंजी लाल पर नाराजगी जताई और गांव की विद्युत आपूर्ति तत्काल सुचारू कराने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने जेई से यह भी पूछा कि आंधी-तूफान के बाद आवश्यक सामग्री मिलने के बावजूद समय पर पोल क्यों नहीं लगाए गए और बिना सूचना उच्च अधिकारियों को बताए किसानों के नलकूपों को ट्रांसफार्मर से क्यों जोड़ा गया।
तथ्यों के आधार पर होगी कार्रवाई
उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और जांच रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर तैयार की जाएगी। फिलहाल, जांच के बाद भी ग्रामीणों में आक्रोश बना हुआ है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
