नया बदायूं संवाददाता। ऋतु चक्र में बदलाव के साथ ही प्रकृति में नवीनता का संचार होने लगा है। जनवरी के समापन और ‘ऋतुराज’ वसंत के आगमन यानी फरवरी माह की शुरुआत के साथ ही विद्यार्थियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण चरण का आरंभ हो रहा है। गिंदो देवी महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. इति अधिकारी ने विद्यार्थियों को इस बदलते मौसम में परीक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी है।
अनुकूल मौसम, मानसिक संतुलन का आधार।
डॉ. इति के अनुसार, फरवरी और मार्च का समय शैक्षणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही वह समय है जब अधिकांश बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। प्रकृति भी इस समय विद्यार्थियों का साथ देती है। न अत्यधिक ठंड और न ही भीषण गर्मी—यह संतुलित वातावरण मानसिक एकाग्रता के लिए सबसे उपयुक्त होता है। इस सुखद मौसम में विद्यार्थियों के मन में तनाव के बजाय प्रसन्नता का भाव अधिक होना चाहिए, जो उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाता है।
परिणाम के डर से मुक्त हों विद्यार्थी।
अक्सर देखा गया है कि परीक्षा की आहट के साथ ही कई विद्यार्थियों में ‘परीक्षा परिणाम’ को लेकर एक अनजाना भय और बेचैनी घर कर लेती है। डॉ. इति अधिकारी का कहना है कि विद्यार्थियों को परिणामों की चिंता छोड़कर केवल अपने ‘कर्म’ और ‘निष्ठा’ पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जीवन में परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है, और परीक्षा भी इसी परिवर्तन का एक हिस्सा है।
डॉ इति अधिकारी ने दिए सफलता के मूल मंत्र।
डॉ. इति ने परीक्षार्थियों को भयमुक्त रहने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। डॉ इति ने कहा कि परिणामों के बारे में सोचने के बजाय पूरी ईमानदारी से पढ़ाई करें। परीक्षा के दौरान उचित और सुपाच्य भोजन लें ताकि शरीर और मस्तिष्क ऊर्जावान बना रहे। साथ ही शांत चित्त से परीक्षा की तैयारी करें, जिससे स्मृति और प्रस्तुतीकरण बेहतर हो सके। इसके अलावा विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि परीक्षा केवल अंकों का खेल नहीं, बल्कि जीवन के नए परिवर्तनों को अपनाने का एक लक्ष्य है। यदि विद्यार्थी मानसिक संतुलन और कड़ी मेहनत का समन्वय बना लें, तो वे निश्चित रूप से सफल परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
