बदायूं, संवाददाता।
रामलीला के पावन अवसर पर श्रीराम विवाह के उपलक्ष्य में कल भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा सायं चार बजे बिरुआबाड़ी मंदिर से प्रारंभ होकर रामलीला मैदान पहुंचेगी। आयोजन को भव्य, आकर्षक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर बनाने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। इस बार शोभायात्रा में राजस्थान की समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक विरासत की विशेष झलक देखने को मिलेगी।

कमेटी अध्यक्ष अरविंद कांत ने बताया कि शोभायात्रा की मुख्य विषयवस्तु राजस्थान की लोक संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित रखी गई है। इसके लिए राजस्थान के बांदीकुई, जयपुर, चित्तौड़गढ़ और जोधपुर से कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। ये कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगे। राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और पारंपरिक प्रस्तुतियों के संगम से आयोजन को विशेष स्वरूप देने की तैयारी है।

हरियाणा के ढोल और पंजाब का भांगड़ा बढ़ाएंगे रौनक
श्रीराम विवाह शोभायात्रा में राजस्थान की संस्कृति के साथ दूसरे राज्यों की लोक कलाओं का संगम भी देखने को मिलेगा। हरियाणा के प्रसिद्ध ढोल की गूंज और पंजाब के पारंपरिक भांगड़े की प्रस्तुतियां आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। कलाकारों की प्रस्तुतियों से शोभायात्रा में उत्साह और उल्लास का माहौल बनने की उम्मीद है।
इसके अलावा आसपास के जनपदों के साथ नजीबाबाद, पीलीभीत और आगरा सहित अन्य स्थानों से भी कलाकार एवं श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होंगे। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले कलाकारों की सहभागिता से शोभायात्रा को व्यापक और आकर्षक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति की विविधता इस आयोजन को खास बनाएगी।
आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां
आयोजन समिति के अनुसार, श्रीराम विवाह शोभायात्रा को आकर्षक, सांस्कृतिक और व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए तैयारियां की गई हैं। बिरुआबाड़ी मंदिर से शुरू होकर रामलीला मैदान तक पहुंचने वाली शोभायात्रा में धार्मिक उत्साह के साथ विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
वहीं, आयोजन के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से पुलिस के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजकों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नगरवासी शोभायात्रा में शामिल होकर श्रीराम विवाह उत्सव की खुशियों में सहभागी बनेंगे। धार्मिक परंपरा, लोक संस्कृति और विभिन्न राज्यों की कलाओं का संगम बदायूं में इस आयोजन को यादगार बनाने की तैयारी में है।

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