नया बदायूं ब्यूरो, सहसवान।
मेरे जुनून का नतीजा जरूर निकलेगा, इसी संकल्प के साथ सहसवान क्षेत्र के तोफी नगला निवासी सामाजिक कार्यकर्ता तिलक सिंह ने चार साल पहले जो मुहिम शुरू की थी, वह अब साकार हो रही है। आजादी के बाद से उपेक्षित पड़े 30 गांवों को महावा नदी पर पुल की सौगात मिल गई है।
चार साल का कड़ा संघर्ष लाया रंग : तिलक सिंह
सहसवान क्षेत्र के बड़ेरिया और आसपास के ग्रामीण दशकों से महावा नदी पर पुल की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर ट्यूब के सहारे नदी पार करनी पड़ती थी, जिससे कई बार हादसे भी हुए। तिलक सिंह ने इस गंभीर समस्या को देखते हुए चार साल पहले ठान लिया था कि वे पुल मंजूर कराकर ही दम लेंगे। उन्होंने जिला स्तर से लेकर शासन तक अपनी आवाज बुलंद की। तिलक सिंह ने विधायक, जिलाधिकारी, प्रमुख सचिव (पीडब्ल्यूडी), मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय तक लगातार पत्राचार किया। कई बार वे स्वयं लखनऊ जाकर सेतु निगम के उच्च अधिकारियों से मिले। उनके इस निरंतर प्रयास का नतीजा रहा कि मार्च 2025 में शासन ने पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
सेतु निगम द्वारा वर्तमान में पिलर खड़े करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। परियोजना का विवरण इस प्रकार है,
- कुल लागत: 21 करोड़ 84 लाख 93 हजार रुपये।
- पुल की लंबाई: 120.68 मीटर।
- पहुंच मार्ग: 400 मीटर मुख्य मार्ग और 2500 मीटर अतिरिक्त पहुंच मार्ग।
- लक्ष्य: सेतु निगम के अनुसार, अगले वर्ष तक पुल जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।
इन 30 गांवों की राह होगी आसान
इस पुल के बनने से बड़ेरिया, नसीरपुर गौंसू, भीकमपुर, कुर्वानपुर, शुजातगंज बेला, अब्बूनगर, खिरकवारी, जरीफपुर गढ़िया, जखुपुर, सिरकी दम्मू, बक्सर, नरसैना और पालपुर समेत करीब 30 गांवों की बड़ी आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। अब इन ग्रामीणों को तहसील और जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए मिलों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और न ही जान जोखिम में डालनी होगी।
