नया बदायूं उत्तर प्रदेश ब्यूरो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार देर शाम एक उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश की कायाकल्प करने वाली प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, ऊर्जा और शिक्षा परियोजनाओं की सघन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देशित किया कि सभी ‘मेगा प्रोजेक्ट्स’ को तय समय सीमा के भीतर और उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ धरातल पर उतारा जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का विस्तार
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे (594 किमी) के निर्माण कार्यों को हर हाल में फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 12 जनपदों को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की कृषि, औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों की रीढ़ बनेगा। इसके साथ ही, जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को त्वरित गति से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री का विजन है कि यह एयरपोर्ट एयर कार्गो और वैश्विक कनेक्टिविटी का केंद्र बनकर रोजगार सृजन में क्रांति लाए। इसके अतिरिक्त, ग्रेटर नोएडा में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से यूपी को वैश्विक सप्लाई-चेन का हब बनाने की तैयारी है।
कृषि, ऊर्जा और शिक्षा में परिवर्तनकारी पहल
सिंचाई क्षेत्र में मध्य गंगा नहर परियोजना (स्टेज-2) के माध्यम से अमरोहा, मुरादाबाद और संभल के किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया, जबकि बुंदेलखंड की एरच परियोजना से क्षेत्र में पेयजल और जल संरक्षण सुनिश्चित होगा। ऊर्जा के क्षेत्र में रिहंद और ओबरा पंप स्टोरेज परियोजनाओं को ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल योजना’ को प्राथमिकता दी, जिसके तहत 75 जनपदों में 150 आधुनिक विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। ये स्कूल डिजिटल लर्निंग और आधुनिक प्रयोगशालाओं से लैस होंगे। मुख्यमंत्री ने अंत में स्पष्ट किया कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल निर्माण नहीं, बल्कि समय पर जन-उपयोगी परियोजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना ना है।

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