बदायूं, संवाददाता।
करवा चौथ का पर्व इस बार कई शुभ ज्योतिषीय संयोगों के बीच मनाया जाएगा। लक्ष्मी नारायण राजयोग, बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग और शुक्रादित्य योग सहित कई शुभ योग इस पर्व को विशेष बना रहे हैं। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र, परिधि एवं गौरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ वृषभ राशि में चंद्रमा का गोचर भी इस दिन के धार्मिक महत्व को बढ़ाएगा।
हिंदू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। महिलाएं शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
29 अक्टूबर को रखा जाएगा व्रत
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 28 अक्टूबर की रात 1:08 बजे होगा और समापन 29 अक्टूबर की रात 10:11 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
करवा चौथ के शुभ मुहूर्त
करवा चौथ के दिन व्रत का समय सुबह 6:31 बजे से रात 8:17 बजे तक बताया गया है। पूजन के लिए शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक का समय शुभ रहेगा। इस वर्ष करवा चौथ पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।
सुबह 3:30 से 5:30 बजे तक सरगी का समय
करवा चौथ में सरगी का विशेष महत्व है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं। इस वर्ष सरगी खाने का समय सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच बताया गया है। सूर्योदय सुबह 6:22 बजे होगा, इसलिए सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण कर लेनी चाहिए।
रात 8:04 बजे होगा चंद्रोदय
ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 8:04 बजे होगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
करवा चौथ का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में करवा चौथ को सौभाग्य और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं गणेश जी और चंद्र देव की पूजा कर पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और खुशहाली बनी रहती है।
नारद पुराण में भी इस व्रत का उल्लेख ‘करकाख्यं व्रतम’ के रूप में मिलता है। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस वर्ष बनने वाले विभिन्न शुभ योग करवा चौथ के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व को विशेष बनाएंगे।
