नया, संवाददाता बदायूं।
सावन के पावन माह में जहां हजारों कांवड़िए भगवान शिव की भक्ति में कांवड़ लेकर गंगा घाटों से अपने-अपने शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं उझानी क्षेत्र के चेतूनगला गांव निवासी कप्तान सिंह यादव की कांवड़ यात्रा लोगों के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। कप्तान सिंह ने अपनी कांवड़ के दोनों सिरों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता को बैठाकर गंगा जल की यात्रा पूरी की। उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि माता-पिता की सेवा, सम्मान और भारतीय संस्कारों की भावुक तस्वीर भी सामने ला रही है।

कप्तान सिंह यादव अपने पिता गुलकंद सिंह और मां रामप्यारी को कांवड़ में बैठाकर मोक्षदायिनी मां गंगा के कछला घाट पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से गंगा जल लिया और माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर गांव की ओर रवाना हुए। रास्ते में जब लोगों ने कांवड़ के दोनों सिरों पर माता-पिता को बैठे देखा तो यह दृश्य हर किसी का ध्यान खींचने लगा। कई लोगों ने इसे माता-पिता के प्रति बेटे के समर्पण और श्रद्धा की अनूठी मिसाल बताया।

कप्तान सिंह अपने माता-पिता को साथ लेकर गांव पहुंचे हैं। अब सोमवार को वह शिवालय में गंगा जल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इस दौरान उनके साथ माता-पिता भी रहेंगे। कप्तान सिंह की इस यात्रा में एक ओर भगवान शिव के प्रति आस्था दिखाई दे रही है तो दूसरी ओर माता-पिता की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की भावना भी नजर आ रही है।

कांवड़ यात्रा बनी सेवा और संस्कारों की मिसाल
कप्तान सिंह का कहना है कि माता-पिता ने जीवनभर बच्चों के लिए त्याग और मेहनत की है। आज जब उन्हें तीर्थ यात्रा कराने और उनकी सेवा करने का अवसर मिला तो इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए कुछ नहीं हो सकता। इसी भावना के साथ उन्होंने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर यात्रा पूरी करने का निर्णय लिया।

इस अनूठी कांवड़ यात्रा को देखकर लोगों को भारतीय संस्कृति में माता-पिता के सम्मान और सेवा की परंपरा की याद आ रही है। लोगों का कहना है कि जिस कंधे पर कभी माता-पिता ने अपने बच्चों को बैठाकर उन्हें दुनिया दिखाई थी, उसी कंधे पर आज बेटा अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा करा रहा है। यह दृश्य भावनाओं के साथ-साथ संस्कारों की भी गहरी तस्वीर पेश करता है।
कांवड़ के दोनों सिरों पर माता-पिता, मन में महादेव
कांवड़ के एक ओर पिता गुलकंद सिंह और दूसरी ओर मां रामप्यारी बैठे रहे, जबकि कप्तान सिंह कांवड़ को अपने कंधे पर लेकर यात्रा करते रहे। रास्ते में यह दृश्य देखने वाले श्रद्धालु और ग्रामीण भावुक नजर आए। लोगों ने कप्तान सिंह के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि भगवान शिव की भक्ति के साथ माता-पिता की सेवा का यह संगम बेहद प्रेरणादायक है।
कछला से गांव तक की यात्रा में कप्तान सिंह ने अपने माता-पिता को अपने साथ रखा। अब सोमवार को शिवालय में गंगा जल चढ़ाकर वह अपनी कांवड़ यात्रा पूरी करेंगे। उनकी यह यात्रा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच यह संदेश दे रही है कि धार्मिक आस्था के साथ माता-पिता का सम्मान और सेवा भी जीवन के सबसे बड़े संस्कारों में शामिल है।
कांवड़ के दोनों सिरों पर माता-पिता और दिल में महादेव—कप्तान सिंह यादव की यह यात्रा आस्था, सेवा, समर्पण और संस्कारों की ऐसी तस्वीर बन गई है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हुए बिना नहीं रह पा रहा।

Discussion about this post