बदायूं संवाददाता।
सुरक्षित बचपन की निगरानी समिति द्वारा मंगलवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया गया। इस दौरान समिति के सदस्यों ने कारागार में अपनी माताओं के साथ रह रहे बच्चों की स्थिति का जायजा लिया और उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, संरक्षण तथा बुनियादी जरूरतों की समीक्षा की। समिति ने संबंधित अधिकारियों को बच्चों के समुचित विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि वर्तमान में जिला कारागार में 11 बच्चे अपनी माताओं के साथ रह रहे हैं। समिति ने इन बच्चों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। बच्चों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कराने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी तथा एसीएमओ एवं बाल रोग विशेषज्ञ को आवश्यक निर्देश दिए गए।
समिति ने बच्चों को उनकी जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाएं, शैक्षिक सुविधाएं और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया। संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने विभागों के माध्यम से बच्चों के हित में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें बेहतर वातावरण और विकास के समुचित अवसर मिल सकें।
बच्चों की काउंसलिंग और आईसीपी फॉलोअप के निर्देश
कारागार में अपनी माताओं के साथ रह रहे 11 बच्चों की व्यक्तिगत देखभाल योजना (आईसीपी) का नियमित फॉलोअप कराने के निर्देश जिला बाल संरक्षण अधिकारी को दिए गए। साथ ही बच्चों की परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर उनकी काउंसलिंग कराने पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों की जरूरतों की पहचान कर उन्हें आवश्यक संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध कराना है।
महिला बंदियों के घरों में रह रहे बच्चों को भी मिलेगा योजनाओं का लाभ
निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशासन मानवेन्द्र सिंह ने महिला बंदियों के उन बच्चों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, जो अपने घरों में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए जाएं।
इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराने तथा पात्र बच्चों को विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। समिति ने बच्चों के संरक्षण और कल्याण से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया।
अधिकारियों ने किया व्यवस्थाओं का निरीक्षण
जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशासन मानवेन्द्र सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मेन्द्र कुलश्रेष्ठ, मुख्य चिकित्साधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नन्द किशोर पाठक, संरक्षण अधिकारी रवि कुमार, संरक्षण अधिकारी प्रीती कौशल, सामाजिक कार्यकर्ता भमरपाल सिंह, मुख्य सेविका पूनम यादव, जिला कारागार के जेलर शैलेश कुमार सोनकर तथा डिप्टी जेलर अनन्या अत्री उपस्थित रहे।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य कारागार में रह रहे बच्चों की जरूरतों का आकलन करना, उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा की व्यवस्था की समीक्षा करना तथा महिला बंदियों के परिवारों में रह रहे बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना रहा।
