नया बदायूं

बदायूं मेडिकल कॉलेज में युवती के साथ इंसानियत ने थोड़ी दम, उपचार के अभाव में मौत, कंधे पर शव लटका कर घूमता रहा भाई, नहीं मिला उपचार और शव वाहन

नया बदायूं, संवाददाता।

देश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बीच बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज से सामने आई एक दर्दनाक तस्वीर ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत बयां करती है, बल्कि इंसानियत को भी झकझोर देने वाली है। बदायूं राज की मेडिकल कॉलेज में जहां उपचार के अभाव में युवती की मौत हुई है वही इसके साथ-साथ इंसानियत ने भी दम तोड़ दी है। क्योंकि युवती की मौत के बाद उसका भाई उसके शव को कंधे पर लटका कर घूमता रहा लेकिन ना तो स्ट्रेचर मिला और ना ही शव वाहन मिल सका आखिरकार ऑटो में शव लेकर गांव पहुंचा। इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से संपर्क किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो सका इसीलिए उनकी ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

मेडिकल कॉलेज में उपचार के अभाव में थोड़ी दम
तस्वीर में एक युवक अपनी करीब 18-20 वर्षीय बहन के शव को कंधे पर उठाकर मेडिकल कॉलेज की सीढ़ियों से नीचे उतरता दिखाई देता है। यह दृश्य केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि उस स्वास्थ्य तंत्र की विफलता का प्रतीक है, जिस पर लोगों की जिंदगी टिकी होती है। जानकारी के अनुसार, बिल्सी क्षेत्र के गांव खैरी निवासी इसराइल अपनी बेटी तरन्नुम को बचाने की उम्मीद लेकर सुबह करीब 11 बजे बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। परिजनों को भरोसा था कि बड़े अस्पताल में उनकी बेटी को समय पर इलाज मिलेगा, लेकिन उनकी उम्मीदें जल्द ही टूट गईं। बताया जा रहा है कि तरन्नुम अस्पताल परिसर में ही बेंच पर पड़ी रही और वह सांसों के लिए तड़पती रही, लेकिन काफी देर तक उसे कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी। आरोप है कि न तो मौके पर कोई डॉक्टर उपलब्ध था और न ही प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई। इलाज के अभाव में आखिरकार तरन्नुम ने अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों द्वारा अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस बीच, परिवार की पीड़ा और बढ़ गई जब मौत के बाद भी उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।

स्ट्रेचर तक नहीं मिल सका तो कंधे पर लाये शव
सबसे ज्यादा संवेदनहीन तस्वीर तब सामने आई जब अस्पताल प्रशासन द्वारा मृतका के शव को ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही व्हीलचेयर। मजबूर होकर भाई ने अपनी बहन के शव को कंधे पर उठाया और दो मंजिल नीचे सीढ़ियों से उतरकर बाहर लाया।

आटो से शव ले गए परिजन
इतना ही नहीं, शव को घर ले जाने के लिए भी अस्पताल की ओर से शव वाहन या एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। अंततः परिजन एक ऑटो के जरिए शव को गांव ले जाने को विवश हुए। यह घटना गरीब परिवारों की बेबसी और व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है।

आए दिन होती है लापरवाही
यह पहली बार नहीं है जब बदायूं मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी यहां अव्यवस्थाओं, लापरवाही और संसाधनों की कमी को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं।

जिम्मेदार नहीं निभाते जिम्मेदारी
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीबों को इस तरह अपमान और लापरवाही का सामना करना पड़ेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनशीलता पूरी तरह खत्म हो चुकी है? क्या मरीजों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं रह गई है?

घटना से खुली पोल
इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।

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