लखनऊ, संवाददाता। नया बदायूं
उत्तर प्रदेश की जनता को जनता को बिजली का करंट के झटके लगने वाले हैं। क्योंकि उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग सोमवार छह अप्रैल को कानपुर में वित्तीय वर्ष 2026-27 की विद्युत दरों के लिए अंतिम सुनवाई करेगा। अन्य स्थानों पर सुनवाई पूरी हो चुकी है ऐसे में इस सुनवाई के बाद प्रदेश में नई बिजली दरों की घोषणा की जाएगी। अगर बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी हुई तो एक तरह से जनता के लिए बिजली करंट की तरह झटका लगेगा।
भाजपा सरकार में आज एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की जनता को नया झटका लग सकता है। सोमवार को सुनवाई में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा उपभोक्ताओं की ओर से पक्ष रखेंगे। वे बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं और मांगों को आयोग के समक्ष मजबूती से उठाएंगे। परिषद की ओर से करीब 51 हजार करोड़ रुपये उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर अधिक होने का हवाला देते हुए बिजली दरों में कमी की जोरदार मांग की जाएगी। साथ ही प्रदेशभर में लगाए जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों को भी प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। मगर इस सुनवाई के दौरान जरूरी नहीं है कि बिजली दरों में केवल कमी हो, इस दौरान बिजली की नई दरों में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है।
बिना सहमति 70 लाख मीटर बदले
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियां विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन कर रही हैं। इसको लेकर आयोग में अवमानना याचिका भी दाखिल की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के हालिया बयान के अनुसार बिना उपभोक्ता की सहमति के प्रीपेड मीटर में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद प्रदेश में करीब 70 लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में बदला जा चुका है, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
यह रहेंगे मांग
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि बिजली दरों में तत्काल कमी, स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म करने, बिना सहमति कोई नई व्यवस्था लागू न करने व वर्टिकल व्यवस्था को वापस लेने की मांग की जाएगी।

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