नया बदायूं

जिला महिला अस्पताल और सीएचसी बिसौली में ब्लड स्टोरेज सेंटर की कवायद तेज

नया बदायूं, संवाददाता।

जिले में मरीजों को जरूरत के समय रक्त उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास तेज किए गए हैं। इसी क्रम में जिला महिला चिकित्सालय बदायूं और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसौली में ब्लड स्टोरेज यूनिट से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने दोनों स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर लाइसेंस प्रक्रिया और आवश्यक व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

महिला अस्पताल में 30 यूनिट ब्लड का होगा सेंटर

मंगलवार को जिला महिला चिकित्सालय बदायूं में प्रस्तावित ब्लड स्टोरेज यूनिट के नवीन लाइसेंस के लिए निरीक्षण किया गया। यहां स्थापित की जाने वाली ब्लड स्टोरेज यूनिट की क्षमता 30 यूनिट संपूर्ण मानव रक्त रखने की है। निरीक्षण के दौरान यूनिट से संबंधित व्यवस्थाओं, आवश्यक संसाधनों और लाइसेंस के लिए निर्धारित प्रक्रिया का नियमानुसार परीक्षण किया गया।

बिसौली में 10 यूनिट का होगा ब्लड सेंटर

इसी क्रम में बुधवार को औषधि निरीक्षक ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसौली की ब्लड स्टोरेज यूनिट का भी निरीक्षण किया। यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट के लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया के तहत व्यवस्थाओं को परखा गया। इस यूनिट की क्षमता 10 यूनिट संपूर्ण मानव रक्त रखने की है।

निरीक्षण के दौरान ब्लड स्टोरेज यूनिट से संबंधित व्यवस्थाओं के साथ लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज और निर्धारित मानकों के अनुपालन की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। दोनों स्थानों पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई नियमानुसार आगे बढ़ाई जा रही है।

मरीजों को समय पर मिल सकेगा रक्त

जिले के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की सुविधा उपलब्ध होने से जरूरत के समय मरीजों को रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से जिला महिला चिकित्सालय में प्रसव, ऑपरेशन और अन्य चिकित्सा परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ने पर यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है।

इसी तरह बिसौली क्षेत्र के मरीजों को भी रक्त की जरूरत पड़ने पर दूर स्थित ब्लड बैंक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। दोनों केंद्रों की कुल प्रस्तावित/उपलब्ध क्षमता 40 यूनिट संपूर्ण मानव रक्त की होगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए ब्लड स्टोरेज यूनिट महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। इनके माध्यम से निर्धारित मानकों के अनुसार रक्त को सुरक्षित रखा जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकता है। लाइसेंस प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सुविधाओं से स्थानीय स्तर पर रक्त की उपलब्धता को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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