नया बदायूं

अभिगांव गौशाला में गोवंशों की मौत के बाद पहुंचे पशुपालन विभाग के डायरेक्टर, अफसरों पर कार्रवाई तय

बदायूं, संवाददाता। 

जनपद बदायूं के विकास खंड म्याऊं के ग्राम अभिगांव स्थित गौशाला में गोवंशों की मौत के मामले के बाद शुक्रवार देर शाम लखनऊ से पशुपालन विभाग के डायरेक्टर मौके पर पहुंचे। उन्होंने गौशाला का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की बारीकी से जानकारी ली और मौके पर मौजूद अधिकारियों से गोवंशों की संख्या, रखरखाव तथा उपलब्ध संसाधनों के बारे में जानकारी प्राप्त की।


शुक्रवार की देर शाम को निरीक्षण के दौरान डायरेक्टर ने गौशाला में मौजूद गोवंशों की स्थिति देखी। उन्होंने उनके लिए उपलब्ध चारा, पानी, रहने की व्यवस्था और साफ-सफाई का जायजा लिया। गोवंशों के रखरखाव में किसी तरह की कमी न रहे, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
डायरेक्टर ने गौशाला की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन साइड शेड/बाड़े बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गौशाला में पर्याप्त स्थान की व्यवस्था होना जरूरी है, जिससे गोवंशों को रखने में किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा अतिरिक्त गोवंशों को अन्य गौशालाओं में संरक्षित करने की व्यवस्था करने को कहा गया, ताकि एक ही स्थान पर क्षमता से अधिक पशुओं का दबाव न बने।
उन्होंने अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को निर्देशित किया कि गौशाला में गोवंशों की नियमित निगरानी की जाए। पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने के साथ बीमार गोवंशों का समय से उपचार कराया जाए। इसके साथ ही पर्याप्त मात्रा में चारा और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने तथा गौशाला की साफ-सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
डायरेक्टर ने कहा कि गौशालाओं की व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी। उन्होंने नियमित निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति सामने न आए।
गौशाला में गोवंशों की मौत के बाद विभाग की ओर से मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने डायरेक्टर को गौशाला की वर्तमान स्थिति और अब तक की गई व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी दी। मौके पर संबंधित विभागीय अधिकारी, पशु चिकित्सक और स्थानीय प्रशासन के कर्मचारी मौजूद रहे।
अभिगांव गौशाला को लेकर हुए निरीक्षण के बाद अब शेड और बाड़ों की क्षमता बढ़ाने, अतिरिक्त गोवंशों को दूसरी गौशालाओं में स्थानांतरित करने तथा स्वास्थ्य, चारा-पानी और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। विभाग की ओर से गौशाला की व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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