नया बदायूं

केंद्रीय सनातन शिक्षा बोर्ड के गठन की मांग, शिक्षा में आत्मनिर्भरता पर जोर

नया बदायूं, संवाददाता।

अखिल भारतीय सनातन बोर्ड, जिला बदायूं की एक महत्वपूर्ण बैठक बजरंग नगर, मीराजी चौकी स्थित देवदत्त शर्मा के आवास पर आयोजित की गई। बैठक का आह्वान जिला सूचना एवं कार्यालय मंत्री राकेश साहू द्वारा किया गया, जो देर रात तक चली।
बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा की गई कि हिंदू–सनातन समाज शिक्षा के लिए ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित विद्यालयों पर क्यों निर्भर होता जा रहा है। इस विषय पर व्यापक चिंतन-मंथन किया गया।
संगठन कार्य अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि इतिहास में मुगलों द्वारा मंदिरों पर आक्रमण, अंग्रेजों द्वारा गुरुकुल परंपरा का विनाश और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विदेशी भाषा के बढ़ते प्रभाव ने हमारी सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर किया है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा के अनावश्यक वर्चस्व के कारण बच्चों की व्यावहारिक समझ, नवाचार क्षमता और रचनात्मकता प्रभावित हो रही है।
कार्यकारिणी प्रमुख देवदत्त शर्मा ने बताया कि वर्ष 1835 में लॉर्ड मैकाले द्वारा लागू शिक्षा नीति ने भारतीय वैदिक शिक्षा प्रणाली को गहरा आघात पहुंचाया, जिसका प्रभाव आज भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता के कारण अभिभावक अपने बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही अंग्रेजी माध्यम की ओर ले जा रहे हैं, जो एक चिंताजनक प्रवृत्ति है।
मठ-मंदिर विभाग प्रमुख एडवोकेट अश्वनी भारद्वाज ने कहा कि औपनिवेशिक काल की नीतियों ने भारतीय न्याय व्यवस्था और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया है, जिसका असर आज तक बना हुआ है।
मुख्य अतिथि एवं सरस्वती शिशु मंदिर, मीरा की चौकी के प्रधानाचार्य कालिका प्रसाद ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और पारिवारिक मूल्यों पर भी विशेष ध्यान देते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को केवल अंकों के बजाय योग्य और संस्कारी बनाने पर ध्यान दें।
विशिष्ट अतिथि प्रणव शास्त्री ने बदायूं की ऐतिहासिक और वैदिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह क्षेत्र प्राचीन काल से वेदों की भूमि रहा है, जिसका पौराणिक नाम वेदामऊ था। उन्होंने स्वामी दर्शनानंद सरस्वती द्वारा स्थापित सूर्यकुंड गुरुकुल (1903) का भी उल्लेख किया।
नारी शक्ति विभाग अध्यक्ष रचना शंखधार ने परिवार में संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए, विशेष रूप से बेटियों की सुरक्षा और मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
संगठन अध्यक्ष जितेंद्र साहू ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता समय की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से “केंद्रीय सनातन शिक्षा बोर्ड” के गठन की मांग उठाने की बात कही। साथ ही पतंजलि विश्वविद्यालय के सहयोग से जनपद में एक आधुनिक गुरुकुल स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जहां पारंपरिक विषयों के साथ आधुनिक विज्ञान की शिक्षा दी जा सके।
बैठक में डॉ. अशोक कुमार शर्मा, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. अमर सिंह, डॉ. नरेंद्र कुमार कश्यप, नरेंद्र कुमार गुप्ता, सुभाष मैथिल, अरविंद गुप्ता, नंदकिशोर, सचिन चौहान, पं. मनोज कुमार मिश्रा, राकेश गुलाटी, विनोद कुमार सिंह, मणि भदौरिया, विजय रतन सिंह, मुनीष पाल शर्मा, चंद्र देव वर्मा सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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