नया बदायूं लखनऊ ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के तहत कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अब अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। प्रदेश में लंबे समय से लंबित मानदेय और कमिटेड भुगतान न होने के विरोध में एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स उत्तर प्रदेश ने 14, 15 और 16 जनवरी को प्रदेशव्यापी ज्ञापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
जिलाधिकारी के माध्यम से सरकार को भेजेंगे मांगपत्र
एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के सभी जनपदों के जिलाध्यक्ष और जिला महामंत्री अपने-अपने क्षेत्रों में जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के माध्यम से मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक को ज्ञापन सौंपेंगे।
ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल हैं:
- वित्तीय वर्ष 2024-25 का लंबित पी.बी.आई.और मानदेय।
- बकाया टी.ए., कम्युनिकेशन अलाउंस और वैलनेस एक्टिविटी का भुगतान।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के माह दिसंबर का मानदेय एवं अन्य समस्त बकाया राशियों का तत्काल भुगतान।
प्रशासनिक लापरवाही पर रोष
ACHOUP के पदाधिकारियों का कहना है कि बार-बार पत्राचार और आश्वासनों के बावजूद भुगतान न होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण है। इससे न केवल स्वास्थ्य अधिकारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
आंदोलन और डिजिटल स्ट्राइक की चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष हिमालय कुमार ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन अभियान सरकार के लिए एक अंतिम चेतावनी है। उन्होंने कहा, “CHO टकराव की राजनीति नहीं चाहते, लेकिन अपने वैध अधिकारों की रक्षा के लिए हम पूरी तरह संगठित हैं। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो हम कार्यबहिष्कार और डिजिटल स्ट्राइक जैसे कड़े कदम उठाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
