नया बदायूं, संवाददाता।
राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही 17 वर्षीय मरीज तरन्नुम की मौत के मामले में आधिकारिक बयान मीडिया सेल से जारी कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर दिखाया गया है। कहां है कि तरन्नुम की मौत लापरवाही से नहीं हुई है।
बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज मीडिया सेल की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हुसैनपुर गांव निवासी 17 वर्षीय तरन्नुम 10 जुलाई 2026 को अपने भाई रियासत के साथ इलाज के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, बदायूं पहुंची थीं। यहां सबसे पहले मनोचिकित्सा विभाग में उनका पंजीकरण कराया गया। इसके बाद अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट अजीमा, जो मरीज की परिचित भी थीं, उन्हें लेकर मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में गईं। दोपहर करीब 12:30 बजे मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. नरवीर यादव ने मरीज का परीक्षण किया। चिकित्सकों के अनुसार, मरीज को पहले अलीगढ़ स्थित एएमयू अस्पताल से LAMA (डॉक्टर की सलाह के खिलाफ अस्पताल छोड़ना) पर लाया गया था। जांच में मरीज को obstructive hydrocephalus with complicated tuberculosis meningitis जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित पाया गया। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल मेडिसिन विभाग में दिखाने की सलाह दी। हालांकि, प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मरीज के तीमारदारों ने आगे इलाज कराने से साफ इनकार कर दिया और मरीज को लेकर अस्पताल परिसर से चले गए।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बाद में फार्मासिस्ट अजीमा को मरीज के भाई रियासत का फोन आया, जिसमें बताया गया कि रास्ते में ही तरन्नुम की मौत हो गई। बदायूं राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर शिवकुमार ने बताया कि तरन्नुम की मौत लापरवाही से नहीं हुई है, उसको डॉक्टर के द्वारा देखा गया इलाज को भी कहा गया लेकिन परिवार ने भर्ती नहीं किया इसलिए इलाज नहीं हो सका। फिलहाल राजकीय मेडिकल कॉलेज से वायरल हो रही वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है।
