नया बदायूं, संवाददाता लखनऊ। राज्य ब्यूरो
अमर ज्योति यूनिवर्सल निधि लिमिटेड समेत अलग-अलग नामों से चिटफंड कंपनियां संचालित कर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के मामले में पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। मामले में आरोपी दो सगे भाइयों शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उनके तीसरे भाई श्रीकांत मौर्य और नेटवर्क से जुड़े करीब 20 एजेंटों पर है। बताया जा रहा है कि श्रीकांत मई 2025 से फरार चल रहा है।
पुलिस के अनुसार, चिटफंड कंपनियों के माध्यम से लोगों को निवेश पर बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाकर रकम जमा कराई गई थी। बाद में निवेशकों को उनकी जमा रकम वापस नहीं मिली तो मामले सामने आने लगे। शिकायतों और जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।
दो भाइयों की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज
मामले में शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर चिटफंड कंपनियों के जरिए लोगों से बड़ी रकम जुटाने और कथित तौर पर उसे हड़पने के आरोप हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं।
जांच का दायरा केवल कंपनी संचालकों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों से संपर्क करने, रकम जमा कराने और कंपनी की योजनाओं का प्रचार करने वाले एजेंटों की भूमिका भी जांची जा रही है। इसी क्रम में करीब 20 एजेंट एसटीएफ के रडार पर बताए जा रहे हैं।
मई 2025 से भूमिगत है श्रीकांत
मामले में तीसरे भाई श्रीकांत मौर्य की तलाश भी की जा रही है। बताया जा रहा है कि वह मई 2025 से ही भूमिगत है। शशिकांत और सूर्यकांत की गिरफ्तारी के बाद श्रीकांत की तलाश को लेकर जांच एजेंसियों की सक्रियता और बढ़ गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कंपनी के संचालन, निवेशकों से रकम जुटाने और कथित वित्तीय लेन-देन में श्रीकांत की क्या भूमिका थी। इसके साथ ही उसके संपर्क में रहे लोगों और संभावित ठिकानों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
तीन मामलों में दाखिल हुई चार्जशीट
उधर, बदायूं में इस प्रकरण से जुड़े तीन मामलों में पुलिस ने शशिकांत मौर्य, सूर्यकांत मौर्य सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पुलिस की विवेचना में सामने आए साक्ष्यों, दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। वहीं फरार आरोपियों और एजेंटों की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी बताई जा रही है।
एजेंटों की भूमिका भी जांच के घेरे में
चिटफंड नेटवर्क में एजेंटों की भूमिका अहम मानी जा रही है। यही एजेंट कथित तौर पर लोगों को कंपनी की योजनाओं की जानकारी देकर निवेश के लिए तैयार करते थे। अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन एजेंटों ने कितने लोगों से रकम जमा कराई और कंपनी के संचालकों तक पैसा किस माध्यम से पहुंचा।
जांच के दौरान एजेंटों के बैंक खातों, मोबाइल संपर्क और कंपनी से जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है। इससे चिटफंड घोटाले के पूरे नेटवर्क और रकम के प्रवाह की तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
करोड़ों की ठगी से जुड़ा है मामला
अमर ज्योति यूनिवर्सल निधि लिमिटेड समेत अलग-अलग नामों से संचालित चिटफंड कंपनियों के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। बड़ी संख्या में निवेशकों की रकम फंसने के बाद मामला पुलिस और एसटीएफ की जांच तक पहुंचा।
अब दो भाइयों की गिरफ्तारी, तीन मामलों में चार्जशीट दाखिल होने और तीसरे भाई समेत करीब 20 एजेंटों के जांच के घेरे में आने के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
