नया बदायूं, संवाददाता।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कवयित्री प्रीति अरोरा ‘प्रीत’ ने अपनी देशभक्ति से ओतप्रोत कविता ‘स्वाधीनता का जश्न’ के माध्यम से आजादी के महत्व, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति नागरिकों के कर्तव्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
कविता में भारत मां के मस्तक पर आजादी का तिलक लगाने और देशवासियों की सुप्त चेतनाओं को जागृत करने का आह्वान किया गया है। रचना स्वतंत्रता संग्राम के उन वीरों को नमन करती है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। रानी लक्ष्मीबाई सहित स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कवयित्री ने राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रमुखता दी है।
‘स्वाधीनता का जश्न’ में वैचारिक स्वतंत्रता, स्वच्छंद जीवन और तिरंगे की गरिमा की रक्षा का संदेश भी मिलता है। कविता में कहा गया है कि आजादी केवल गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति नहीं, बल्कि देश की एकता, सम्मान और स्वतंत्रता की रक्षा की जिम्मेदारी भी है।
रचना के माध्यम से कवयित्री ने देश के वीर जवानों के बलिदान को याद करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति सजग रहने का संदेश दिया है। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता के मूल्यों को समझने और देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया है।
कवयित्री प्रीति अरोरा ‘प्रीत’, बदायूं, उत्तर प्रदेश की यह रचना स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति की भावना को जागृत करने वाली प्रभावशाली अभिव्यक्ति के रूप में सामने आती है।
