नया बदायूं

यूपी के बदायूं में टीले की खुदाई मे निकला खजाना, तुगलक कालीन चांदी सिक्के की मची लूट

नया बदायूं, संवाददाता। लखनऊ ब्योरो
उत्तर प्रदेश के जनपद बदायूं में तालाब पाटने के लिए एक पुराने टीले की खुदाई की गई। खुदाई के दौरान बच्चों को चांदी के सिक्के मिलने की चर्चा के बाद खजाना तलाशने वालों की भीड़ जुट गई। खुदाई में लगी जेसीबी का चालक वाहन छोड़कर भाग गया। सिक्कों से भरे मटके को लेकर चालक और जेसीबी मालिक में मारपीट हुई और तहरीर भी दी गई। पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है। मगर चौंकाने वाली बात यह है कि यह सिक्के सामान्य रुपये के सिक्के नहीं है यह तुगलक कालीन के चांदी के सिक्के हैं। जिनके पीछे सैकड़ों वर्षों पुराना इतिहास है।

बदायूं के अलापुर-ककराला में टीला खुदाई में निकले अरबी भाषा में लिखे सिक्के
अलापुर थाना क्षेत्र के ककराला कस्बे के फरीदपुर–आसपुर मार्ग स्थित टीले (खेरे) पर तालाब पाटने के लिए अवैध खनन किया जा रहा था। गुरुवार दोपहर खेरे से मिट्टी निकालकर फरीदपुर मार्ग स्थित अंतामई तालाब में डाला जा रहा था। इसी दौरान जेसीबी चालक को एक मटकी दिखाई दी, जिसमें तुगलक कालीन होने के दावे के साथ चांदी के प्राचीन सिक्के बताए जा रहे हैं, जिन पर अरबी भाषा में लिखावट है। मटकी दिखते ही चालक जेसीबी छोड़कर फरार हो गया।

200 से अधिक मिले तुगलक कालीन सिक्के
जानकारी मिलने पर जेसीबी मालिक बदायूं स्थित मंडी समिति के पास पहुंचा, जहां सिक्कों के बंटवारे को लेकर दोनों में कहासुनी और झगड़ा हुआ। इसके बाद मंडी पुलिस चौकी पर तहरीर दर्ज कराई गई। उधर, टीले पर खेल रहे कुछ बच्चों को भी सिक्के मिले। खजाना तलाशने की चर्चा फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। कुछ युवकों को खुदाई करते देखा गया, जिन्होंने सिक्के दिखाने से इंकार किया। मौके से लगभग दर्जन भर सिक्कों की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ सूत्र 200 से अधिक सिक्कों की संख्या बता रहे हैं।

 

पुलिस तक पहुंचा मामला
सूचना मिलने पर ककराला पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति संभालते हुए जांच शुरू की। हालांकि अब तक अलापुर थाने में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज हुई है। सिक्कों के मिलने के बावजूद पुरातत्व विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जांच नहीं की गई है, जिससे उनके काल और धातु का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। वहीं, अवैध खनन के कारण प्राचीन टीले को भी नुकसान पहुंच कर गायब किया जा रहा है।

अंग्रेजों का आराम स्थल और ऐतिहासिक गांव
स्थानीय लोगों के अनुसार ककराला का खेरा टीला ऐतिहासिक महत्व रखता है। बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के समय यह टीला सराय के रूप में इस्तेमाल होता था, यानी अंग्रेज अफसर यहां आराम किया करते थे। इसके आसपास एक समय में एक संपन्न गांव भी बसता था, जहां लोग अपने घर-द्वार और खेती-बाड़ी के साथ रहते थे। ग्रामीण इसे अपने इलाके की गौरवशाली धरोहर मानते हैं और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता बताते हैं।

खेरे की खुदाई में फिर उठी खजाने की चर्चा
स्थानीय लोगों के अनुसार खेरे की खुदाई में कई बार मिट्टी के बर्तन और सिक्के मिले हैं, जिससे कस्बे में खजाने को लेकर कौतुहल बना हुआ है। हाल ही में खुदाई में बच्चों को तुगलक और बहादुरशाह कालीन सिक्के मिले, जिससे लोगों में मची हलचल ने हड़कंप जैसा माहौल बना दिया। अनुमान है कि मौके पर सैकड़ों सिक्के होने की संभावना है। ग्रामीण खजाने की खोज में उत्सुकता और चर्चा लगातार बनाए हुए

तुगलक कालीन सिक्कों पर लिखाबट में छिपा इतिहास
तुगलक कालीन सिक्कों पर लिखाबट नासिर-अमीरुल मोमिनीन है, एक उपाधि जो दिल्ली सल्तनत के शक्तिशाली सुल्तानों जैसे इल्तुतमिश और बलबन द्वारा धारण की जाती थी। इसका अर्थ ‘विश्वासियों के सेनापति का सहायक’ है, जो खलीफा से मिली वैधता और शक्ति को दर्शाता था। तुगलक वंश के अंतिम सुल्तान नासिर-उद-दीन महमूद शाह तुगलक के शासनकाल में यह नाम इस्तेमाल हुआ। यह उपाधि सल्तान की शक्ति और इस्लामी दुनिया से मान्यता का प्रतीक थी और तैमूर के आक्रमण के समय वंश के पतन का ऐतिहासिक संकेत भी देती है।

मुगलकालीन हज सिक्कों में दर्ज है दिल्ली की टक्साल और हिजरी वर्ष
स्थानीय बुजुर्ग और जानकारों के अनुसार दूसरा सिक्का अरबी–फारसी मिश्रित वाक्यांशों वाला मुगलकालीन सिक्का लगता है, संभवतः बहादुर शाह जफर के समय का। सिक्के पर लिखा है जर्ब हज अल सिक्का बा हजरत दिल्ली, जिसका अर्थ है कि इसे दिल्ली की टक्साल में ढाला गया पवित्र सिक्का। हिजरी वर्ष फी संह असनी वा असरैन वा सबमाया” दर्शाता है, जो 1222 हिजरी (1807–1808 ईस्वी) के समय का है। इसे आमतौर पर हज यात्रियों के लिए जारी किया गया ‘हज सिक्का’ माना जाता है।

पुलिस की सुनिए::::
अलापुर थाने में तैनात प्रभारी निरीक्षक माधव सिंह बिष्ट ने बताया कि सिक्के मिलने की जानकारी मिली है, ककराला पुलिस चौकी इंचार्ज ने लोगों से 7 सिक्के बरामद किए हैं जिन्हें जांच के लिए पुरातत्व विभाग को भेजा जाएगा और पूरे मामले की जांच की जा रही है। वहीं, मंडी पुलिस चौकी पर तहरीर देने के मामले में सिविल लाइंस कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक हरेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसी कोई तहरीर उनके संज्ञान में नहीं आई और ना ही उन्हें कोई मामला प्राप्त हुआ है।

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