नया बदायूं, संवाददाता।
बेवजह दिल पर बोझ न भारी रखिये, जिंदगी जंग है इस जंग को जारी रखिये। जब किसी भी इंसान की जुबान पर यह लाइनें आती हैं तो बदायूं में जन्में विश्व विख्यात कवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार की याद आती है। उनकी पुण्य तिथि पर एक बार फिर जनपदवासियों ने याद किया। राष्ट्रीय गीतकार डॉ. उर्मिलेश की 21 वीं पुण्यतिथि पर बदायूं क्लब में श्रद्धांजलि सभा एवं पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में डॉ. उर्मिलेश की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। प्रांगण में पौधारोपण किया।
21वीं पुण्य तिथि के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के एक्साइज कमिश्नर एवं डॉ उर्मिलेश के शिष्य अनुपम कुमार सिंह ने कहा उनके दिखाए मार्ग पर चलना अति आवश्यक है, प्रत्येक व्यक्ति को यह संकल्प लेकर इस दशा में कार्य करना चाहिए। डॉ शैलेन्द्र कबीर ने उन्हें काव्यमय श्रद्धांजलि दी एवं डॉ उर्मिलेश जी की रचनाओं को प्रस्तुत किया। डॉ उर्मिलेश के पुत्र डॉ अक्षत अशेष ने कहा इस वर्ष डॉ उर्मिलेश के 75वें जन्मदिवस को 6 जुलाई से वर्ष भर डॉ उर्मिलेश अमृत महोत्सव मनाया जायेगा, जिसमे सांस्कृतिक, सामाजिक, साहित्यिक एवं शैक्षिक आयोजन वर्ष भर किये जायेंगे। क्लब के वरिष्ठ सदस्य डॉ भास्कर शर्मा, मधुकर शर्मा, रविंद्र मोहन सक्सेना, राहुल चौबे, नरेश कुमार, नितिन गुप्ता, सुमित मिश्रा, प्रोफेसर डॉ बीएन शुक्ला, डॉ रवि भूषण पाठक, डॉ सत्यम मिश्रा, सुशील शर्मा थे।
