नया बदायूं, संवाददाता। ब्यूरो कार्यालाय
उत्तर प्रदेश के बदायूं में मोदी सरकार की लखपति दीदी योजना में बड़ा घोटाला हो गया है। राष्ट्रीय अजीविका मिशन में शिकायतों के पन्ने पलटे गए और फिर जांच की गई तो बड़ा घोटाला सामने आया है। स्वंय सहायता समूह के जरिये लखपति दीदी का सपना सजोय 174 स्वयं सहायता समूहों में बड़ा खेल सामने आया है। इन स्वंय सहायता समूहों ने सामुदायिक निवेश निधि के तौर पर एक करोड़ 75 लाख रुपये ले तो लिये, पर लौटाये नहीं। अब लोन देने वाले बैक समूहों से रिकवरी करेंगे। घपलेबाजी खुलने के भय से विकास भवन के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन मे हड़कंप मचा है। धरातल पर समूह ने न तो कार्य किया है नहीं सरकारी पैसा वापस किया है। एक तरह से घोटाला के दायरे में आ गया है।
बदायूं में 20700 समूह और 2.15 लाख महिलाएं जुड़ीं
बदायूं में समूह बनाकर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं को रोजगार दिये जाने की योजना संचालित है। इसके लिये महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनवाए जाते हैं। उन्हें कुटीर उद्योग या अन्य स्वरोजगार का अवसर देने के लिये लोन दिया जाता है। जिले में 20,700 समूहों में 2.15 लाख महिलाएं जुड़ने का दावा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन करता आया है। हकीकत में किसने समूह संचालित है यह न तो अफसरों से छिपा है और न ही इन समूहों को लोन देने वाली बैकों से। नियमानुसार, समूह को प्रथम चरण में 15 हजार रुपये का रिवॉल्विंग फंड दिया जाता है। उसकी वापसी होने पर सामुदायिक निवेश निधि के अंतर्गत बैंक शाखाएं बिना गारंटी लोन देती हैं। जैसे-जैसे समूह रुपये वापस करते जाते हैं, उनके लोन की लिमिट बढ़ती जाती है।
बदायूं में तीन वर्ष से लगातार निष्क्रीय हैं 174 समूह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों के मुताबिक 174 समूहों को 1.10 लाख रुपये की दर से सामुदायिक निवेश निधि दी गई थी। ये समूह तीन वर्ष से लगातार निष्क्रिय हैं। अब ये कहां संचालित है, किसी को पता नहीं। स्वसहायता समूह का गठन करते समय और लोन लेते समय जो कार्यालय दर्शाया गये वे सभी बंद हो गये। बैंक खातों में भी कोई लेनदेन नहीं हो रहा। जिससे माना जा रहा है कि 479 समूहों ने कामकाज समेट लिया। इस समूहों द्वारा लिया गया लोग वापस नहीं किय जा रहा है। एक करोड़ 75 लाख रुपये फंसने के बाद अब ब्लाक मिशन प्रबंधक एवं बैंक के रिकवरी एजेंटों की टीमें संयुक्त रूप से रिकवरी अभियान चलाएंगी। गांवों में पहुंचकर समूहों की महिलाओं से कहा जाएगा कि रुपये जमा करें।
यह है समूह बनने और लोन का नियम
आजीविका मिशन के अंतर्गत 10 या इससे अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाती हैं। उन्हें सबसे पहले दरी, रजिस्टर आदि के लिए 2500 रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद रिवाल्विंग फंड से 15 हजार रुपये दिए जाते थे, यह धनराशि अब बढ़कर 30 हजार कर दी गई। समूहों की सक्रियता देखते हुए संकुल स्तरीय समिति सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 1.10 लाख रुपये देने की संस्तुति करती थी, यह धनराशि अब 1.50 रुपये कर दी गई। धनराशि दिए जाने पर प्रत्येक बार समूह की सभी महिलाओं के हस्ताक्षर कराए जाते हैं।
अधिकारी की सुनिए:::
राष्ट्रीय अजीविका मिशन के प्रभारी उपायुक्त अखिलेश कुमार चौबे का कहना है कि तीन साल में सिर्फ 174 समूह निष्क्रिय हो गये। जो 1.75 करोड़ रुपये लोन के जमा नहीं किये। नोटिस जारी किये हैं। ब्लाक मिशन प्रबंधक एवं बैंक के रिकवरी एजेंटों की टीमें संयुक्त रूप से रिकवरी अभियान चलायेंगे। सभी समूह से धन की रिकवरी की जायेगी।
