बदायूं, संवाददाता। ब्यूरो कार्यालय
मिशन 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी में शेखूपुर विधानसभा सीट पर चल रही सियासी खींचतान के बीच रविवार को सैफई से आई तस्वीरों ने जिले की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। शेखूपुर से टिकट की दावेदारी को लेकर सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव और विधायक हिमांशु यादव के खेमे तथा पूर्व मंत्री आबिद रजा के बीच चल रही तनातनी को खत्म करने की कोशिश की गई। सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने आशीष यादव, हिमांशु यादव और आबिद रजा के बीच बैठक कराई। इस दौरान सहसवान विधायक बृजेश यादव भी मौजूद रहे। नेताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और साथ में तस्वीरें खिंचवाईं। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
तस्वीरों के सामने आने के बाद सपा नेताओं की ओर से एकजुटता का संदेश दिया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि बदायूं में पार्टी के नेता एक साथ आ गए हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में जिले की सभी छह सीटों पर जीत हासिल करने के लिए मिलकर काम करेंगे। हालांकि, इस सियासी मेल-मिलाप के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आबिद रजा शेखूपुर विधानसभा से टिकट की अपनी दावेदारी जारी रखेंगे या फिर कदम पीछे खींचेंगे?
शेखूपुर में लंबे समय से रहा है एक परिवार का दबदबा
शेखूपुर विधानसभा सीट पर लंबे समय से बनवारी सिंह यादव से लेकर वर्तमान विधायक हिमांशु यादव तक एक ही राजनीतिक परिवार का प्रभाव रहा है। ऐसे में पूर्व मंत्री आबिद रजा की ओर से पिछले डेढ़ साल से इस सीट पर दावेदारी पेश किए जाने के बाद सपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी।
पार्टी के भीतर अपनी-अपनी ताकत दिखाने की कोशिशें भी सामने आईं। आशीष यादव और हिमांशु यादव की ओर से शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र में अलग पीडीए सम्मेलन आयोजित किया गया, वहीं आबिद रजा ने भी इसी विधानसभा क्षेत्र में अपना अलग पीडीए सम्मेलन कर राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। इससे दोनों पक्षों के बीच खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
अब सैफई में हुई मुलाकात और सामने आई तस्वीरों ने सियासी समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि, तस्वीरों से यह स्पष्ट नहीं होता कि शेखूपुर सीट पर टिकट को लेकर कोई सहमति बनी है या नहीं।
दो विधानसभा सीटों पर दावेदारी की चर्चा
आबिद रजा की राजनीति को लेकर बदायूं विधानसभा और शेखूपुर विधानसभा सीटों पर लगातार चर्चा होती रही है। कभी बदायूं सदर सीट से उनकी दावेदारी की बात सामने आती है तो कभी शेखूपुर से चुनाव लड़ने की संभावनाएं जताई जाती हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे दोनों सीटों पर अपनी संभावनाएं बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, समाजवादी पार्टी ने अभी तक 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों की घोषणा नहीं की है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि आबिद रजा किस सीट से चुनाव लड़ेंगे। सैफई की बैठक के बाद अब सबकी निगाहें उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं।
2022 की टीस, इस बार मौका गंवाना नहीं चाहते आबिद रजा?
आबिद रजा के राजनीतिक रुख को समझने के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव का घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उस चुनाव में अंतिम समय तक उनके टिकट को लेकर चर्चाएं और उम्मीदें बनी रहीं, लेकिन अंत में समाजवादी पार्टी ने उन्हें टिकट देने के बजाय रईस अहमद को प्रत्याशी बनाया। इस घटनाक्रम के बाद आबिद रजा के सामने चुनाव लड़ने का अवसर निकल गया था।
अब 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आबिद रजा इस बार टिकट को लेकर कोई भी संभावना समय से पहले छोड़ना नहीं चाहते। यही वजह है कि बदायूं और शेखूपुर दोनों सीटों को लेकर उनकी राजनीतिक सक्रियता चर्चा में रही है।
सुलह हुई, लेकिन टिकट की लड़ाई का जवाब बाकी
सैफई में शिवपाल यादव की पहल पर हुई मुलाकात ने समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच एकजुटता का संदेश जरूर दिया है, लेकिन शेखूपुर विधानसभा सीट को लेकर तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। क्या आबिद रजा अपनी दावेदारी जारी रखेंगे? क्या हिमांशु यादव की सीट पर पार्टी के भीतर सहमति बन गई है? या फिर यह मुलाकात केवल संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश है?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं। फिलहाल, सैफई की तस्वीरों ने बदायूं की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ मिशन 2027 में छह की छह सीटें जीतने का दावा है, तो दूसरी तरफ शेखूपुर के टिकट को लेकर सपा के भीतर दावेदारी और सियासी समीकरणों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
