नया बदायूं,संवाददाता।
तहसील बिसौली क्षेत्र के ग्राम बगरैन में गाटा संख्या 1588ग, रकबा करीब 96 बीघा के निजी तालाब पर वर्ष 2016 से कब्जे का आरोप लगाते हुए तालाब के सहखातेदार लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। तालाब स्वामियों का आरोप है कि तहसील प्रशासन ने भू-माफिया से मिलीभगत कर तालाब की मेड़बंदी तुड़वाकर कब्जा करा दिया, जिससे 36 सहखातेदारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई और करीब 30 परिवार दूसरे प्रदेशों में पलायन कर गए।
तालाब स्वामियों के अनुसार छह परिवारों के लोग अपनी जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग को लेकर 1 मार्च 2022 से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं 25 मई 2026 से रामबाबू कश्यप, तिलक चंद और कमल कश्यप मालवीय आवास गृह पर दिन-रात अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि धरने को 100 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिला और तहसील प्रशासन की ओर से उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
धरने पर बैठे रामबाबू कश्यप ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि अधिकारियों को हजारों प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने ग्राम सभा के करीब 20 बीघा तालाब पर भी अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि तालाब की जमीन पर मकान और दुकानें बना दी गईं तथा तालाब की प्रकृति बदल दी गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा और निजी तालाब की मेड़बंदी तोड़कर दोनों को एकरूप कर दिया गया, जिससे निजी तालाब के सहखातेदारों को अपनी भूमि से वंचित होना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने तहसील प्रशासन और कथित भू-माफिया की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के मछली कारोबार का भी आरोप लगाया है।
तालाब स्वामियों का कहना है कि वर्ष 2016 में जनकल्याण समिति बगरैन पंचवर्षीय समिति को कथित तौर पर 10 वर्ष का पट्टा दिया गया था, जिसकी अवधि 10 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद मछली कारोबार किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने पिछले वर्षों के कारोबार और उससे संबंधित राजस्व का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की है।रामबाबू कश्यप ने कहा कि जब तक ग्राम सभा और निजी तालाब की निष्पक्ष पैमाइश कराकर उनकी अलग-अलग मेड़बंदी नहीं कराई जाती, तब तक वह धरना समाप्त कर घर वापस नहीं जाएंगे।
लगातार कार्रवाई न होने से परेशान प्रदर्शनकारियों ने अब राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए उन्होंने अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक अपनी आवाज पहुंचाई है। उनका कहना है कि गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट है और प्रशासन से न्याय नहीं मिलने के कारण उन्हें यह कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा। हालांकि, तालाब पर कब्जे, पट्टे में अनियमितता, अवैध निर्माण और प्रशासन की कथित मिलीभगत से जुड़े आरोप प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र प्रशासनिक जांच और संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
