नया बदायूं, संवाददाता।
बदायूं शहर के मदर एथीना स्कूल में चल रहे समर कैंप के नौवें दिन बच्चों ने तकनीक की दुनिया से दूर, प्रकृति की गोद में अपनी रचनात्मकता के रंग बिखेरे। आज के विशेष सत्र का मुख्य आकर्षण मृदा शिल्प (पॉटरी मेकिंग) रहा, जहां बच्चों को ईको फ्रेंडली वातावरण के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ मिट्टी को छूने और उसे जीवंत आकार देने का अद्भुत अवसर मिला। इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को प्लास्टिक और अन्य हानिकारक वस्तुओं को छोड़कर प्राकृतिक व पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
शुक्रवार को जब बच्चों के कोमल हाथों ने चाक पर घूमती गीली मिट्टी को छुआ, तो जैसे कला और प्रकृति का सीधा संवाद शुरू हो गया। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में बच्चों ने पूरी एकाग्रता के साथ दीये, कुल्हड़, छोटे घड़े और खिलौने बनाए। मिट्टी की सोंधी महक के बीच अपनी कलाकृतियों को निहारते बच्चों के चेहरों पर प्रकृति से जुड़ने का एक आत्मिक संतोष और गर्व साफ़ झलक रहा था। इस रचनात्मक और प्रकृति-केंद्रित गतिविधि पर विद्यालय की निदेशिका चयनिका सारस्वत ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए कहा आज जहां हमारी पृथ्वी प्लास्टिक और केमिकल जैसी हानिकारक वस्तुओं के बोझ से दबती जा रही है, वहां बच्चों को बचपन से ही प्राकृतिक और विघटनकारी वस्तुओं के प्रति जागरूक करना हमारा परम कर्त्तव्य है। मिट्टी के बर्तन बनाने की इस कला का उद्देश्य कौशल के साथ-साथ बच्चों को यह समझाना भी है कि मिट्टी के कुल्हड़ और बर्तनों का उपयोग हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए कितना लाभकारी है। जब बच्चे अपने हाथों से मिट्टी को आकार देते हैं, तो वे प्रकृति के संतुलन और सृजन की शक्ति को करीब से महसूस करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे ये बच्चे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के सच्चे संवाहक बनेंगे और प्लास्टिक मुक्त समाज की नींव रखेंगे।

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