नया बदायूं, संवाददाता। राज्य ब्यूरो
उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक बार फिर योगी सरकार का बुल्डोजर गरज गया है। आज रविवार सुबह नौ बजे से कैसरबाग पुराने हाईकोर्ट भवन के चारों से अवैध कब्जों को हटाया जाने लगा। कार्रवाई के विरोध में वकीलों का प्रदर्शन किया तो पुलिस बल से खदेड़ा। हालांकि वकीलों का किसी तरह का विरोध न हो, इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल का इंतजाम किया गया है। भारी पुलिस बल को लगा दिया गया है।
रविवार को लखनऊ में कैसरबाग पुराने हाईकोर्ट भवन के चारों ओर से अवैध कब्जा हटाया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हो रही है। जिसमे अधिकांश अवैध चैंबर वकीलों के ही है। हालांकि कोर्ट में नगर निगम ने 72 अवैध कब्जेदारों की सूची दी थी लेकिन बाद में हुए सर्वे में अवैध कब्जों की संख्या दो सौ के करीब पाई गई थी, जिसमें सुरेंद्र नाथ रोड पर 72, स्वास्थ भवन से बीएसएनएल भवन की दीवार से कलेक्ट्रेट चौराहे और चकबस्त रोड तक 47, राजस्व परिषद से स्वास्थ भवन तक 25 और नाले के ऊपर पचास से अधिक कब्जे थे। हालांकि नगर निगम की तरफ से सोलह मई तक कब्जे हटाने की नोटिस देने और लाल निशान लगाने के कारण कई वकीलों ने चैंबर से जालियां हटा ली थी। मगर कुछ अधिवक्ताओं ने विरोध और हंगामा किया तो पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी है।
हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने अधिवक्ता अनुराधा सिंह, अधिवक्ता देवांशी श्रीवास्तव और देवांशी की माता अरूणिमा श्रीवास्तव की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कचहरी रोड से अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन नगर निगम ने यह कहकर कोई कार्रवाई नहीं की थी कि पर्याप्त पुलिस बल के बिना अवैध कब्जों को हटाना संभव नहीं है। अगली सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन को पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराने के साथ ही 25 मई को कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट भी तलब की है। याचिका में अवैध कब्जों की आड़ में हो रही अराजकता का जिक्र किया था।

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