नया बदायूं, संवाददाता।
जनपद में डिलीवरी के बाद होने वाली नवजात की मौत को लेकर मृत्यु दर का आंकड़ा कम करने के लिए सरकार की ओर से अभियान चलाया गया है। जिसमें डाक्टर-कर्मचारियों के बीच प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत महिला अस्पताल में कार्यशाला की गई। जिसमें स्टाफ को बताया गया कि डिलीवरी के बाद तुरंत बच्चा नहीं रोता है तो क्या दिक्कत हो सकती है और बच्चे को क्या उपचार देना चाहिए। इसके लिए कर्मचारियों को पाठ पढ़ाया गया है।
जिला महिला अस्पताल में नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम के तहत कार्यशाला आयोजित की गई। यहां प्रसव कक्ष में ड्यूटी करने वाली स्टॉफ नर्स एवं SNCU व NBSU में कार्यरत स्टॉफ नर्स के लिए दो बैच में प्रशिक्षण दिया गया। दोनों बैच में कुल 70 से अधिक स्टॉफ नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया। ज़िला महिला चिकित्सालय में तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप वार्ष्णेय एवं डॉ० आशीष के द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। यहां उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी/आरसीएच नोडल डॉ. राजवीर सिंह गंगवार एवं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवनीत कुमार सिंह उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रसव के उपरांत उन नवजात को तत्काल Resusitate करना जिनको सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, ऐसा करके अधिक से अधिक नवजात बच्चों की जान बचाई जा सके। हर सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के डॉक्टरों एवं नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया जिससे नवजात की जान बचा सकें। ईवाएम फर्स्ट गोल्डन मिनट का सदुपयोग किया जा सके। इस मौके पर जिला महिला अस्पताल की स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका सिंह चौहान, प्रभारी सीएमओ डॉ. नवनीत सिंह, डिप्टी सीएमओ डॉ. राजवीर गंगवार भी उपस्थित रहे।
बच्चों को दें एआरपी
अस्पताल में प्रसव के बाद अगर बच्चा ना रोए तो उसकी जान को खतरा होता है। ऐसे बच्चों को बचाने के लिए नवजात शिशु का पुनर्जीवन किया जाता है। जिसके लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ जो मातृ एवं शिशु की डिलीवरी या देखबहल करते हैं उन्हें एनआरपी (नवजात पुनर्जीवन कार्यक्रम) के द्वार प्रेरित किया जाता है। जिसे वो जीवन के प्रथम स्वर्णिम क्षण में ही बच्चे को सांस दिला सके और उन्हें बचा सके। जिसमे अंबु बैग एवं मास्क, ऑक्सीजन आदि की सहायता से बच्चों को बचाया जाता है।

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