नया बदायूं, संवाददाता। राज्य ब्यूरो
योगी सरकार में उत्तर प्रदेश में अपराधियों का बचना अब नामुमकिन होने वाला है। योगी सरकार ने प्रदेश की पुलिसिंग को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच के साथ एक नई ऊंचाई दी है। राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) ने 300 प्रशिक्षित क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार कर लिए हैं। हाल ही में संस्थान से 105 एक्सपर्ट्स का तीसरा बैच अपनी 42 दिनों की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर मैदान में उतरने को तैयार है। यह जांबाज पुलिसकर्मी अब घटनास्थल पर अपराधियों द्वारा छोड़े गए सूक्ष्म साक्ष्यों को सहेजने और उनकी वैज्ञानिक व्याख्या करने में सक्षम होंगे।
उत्तर प्रदेश में आधुनिक पुलिसिंग होने जा रही है। वैज्ञानिक जांच के साथ शातिरों पर पैनी नजर रहेगी। एडीजी (तकनीकी सेवाएं) नवीन अरोरा ने प्रशिक्षण के दौरान स्पष्ट किया कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह घटनास्थल पर कोई न कोई सबूत जरूर छोड़ता है। प्रशिक्षित क्राइम सीन एक्सपर्ट्स का मुख्य काम उन गलतियों को रोकना होगा जो अक्सर जांच के दौरान साक्ष्यों के रखरखाव में हो जाती हैं। साइबर और फॉरेंसिक तकनीकों के मिश्रण से अब ऐसी जांच प्रणाली विकसित की जा रही है, जिससे अपराधी कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। इस दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार, सरकार का लक्ष्य कुल 500 एक्सपर्ट्स तैयार करना है। अब तक तीन बैचों के माध्यम से 300 पुलिसकर्मी प्रशिक्षित हो चुके हैं, जबकि चौथा बैच आगामी 27 अप्रैल से शुरू होगा। ट्रेनिंग पूरी करने वाले ये एक्सपर्ट्स अपने-अपने जनपदों और कमिश्नरेट में जाकर कार्यशालाएं (Workshops) आयोजित करेंगे, जिससे पूरे प्रदेश के पुलिस बल में क्राइम सीन मैनेजमेंट की विशेषज्ञता का संचार होगा।
साइबर और डिजिटल एविडेंस पर विशेष फोकस
इस विशेष प्रशिक्षण में केवल पारंपरिक जांच ही नहीं, बल्कि बदलते अपराधों को देखते हुए साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। पुलिसकर्मियों को वैज्ञानिक सैंपलिंग, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन और एविडेंस हैंडलिंग की बारीकियां सिखाई गई हैं। यूपीएसईएफएस के आईजी राजीव मल्होत्रा और डीआईजी हेमराज मीना की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य यूपी पुलिस को ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की दिशा में अग्रणी बनाना है।

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