बदायूं, संवाददाता। ब्यूरो कार्यालय
रुहेलखंड का मिनी कुंभ कहे जाने वाले प्रसिद्ध मेला ककोड़ा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार मेला 17 नवंबर से शुरू होकर 1 दिसंबर तक चलेगा। मेला स्थल पर जिला पंचायत के अधिकारियों ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और भूमि के सीमांकन का काम शुरू करा दिया है। जिला पंचायत के इंजीनियर पवन गोयल और जूनियर इंजीनियर अक्षय सिंह के नेतृत्व में मेला क्षेत्र का सीमांकन किया जा रहा है। अधिकारियों ने मेले की तैयारियों को लेकर निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।

मेला ककोड़ा की शुरुआत 17 नवंबर को झंडी पूजन के साथ होगी। इसके बाद मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मुख्य स्नान होगा, जिसमें बदायूं सहित रुहेलखंड के विभिन्न जनपदों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। मेले का विधिवत उद्घाटन भी नवंबर माह में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा मेला
मेला ककोड़ा में धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। 23 से 25 नवंबर तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें मथुरा की रासलीला, लखनऊ का कठपुतली कार्यक्रम और बदायूं का जादू शो शामिल रहेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं और मेले में आने वाले लोगों को मनोरंजन का अवसर मिलेगा।
खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभा दिखाएंगे खिलाड़ी
23 से 25 नवंबर तक खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं को बेसिक शिक्षा विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग और जिला क्रीड़ा विभाग की ओर से कराया जाएगा। प्रतियोगिताओं में विभिन्न स्तरों के प्रतिभागियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है मेला ककोड़ा
मेला ककोड़ा बदायूं जिले के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल है। गंगा तट पर लगने वाले इस मेले में बदायूं के अलावा रुहेलखंड के कई जनपदों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान का विशेष महत्व होने के कारण मुख्य स्नान के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना रहती है।
मेले का क्षेत्र काफी विस्तृत होता है। जानकारी के अनुसार, मेला स्थल पूर्व-पश्चिम दिशा में लगभग तीन से पांच किलोमीटर और उत्तर-दक्षिण दिशा में चार से छह किलोमीटर तक फैला रहता है। इतनी बड़ी जगह पर मेले की व्यवस्थाएं संभालना जिला पंचायत और संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
इसी को देखते हुए जिला पंचायत के अधिकारियों ने भूमि सीमांकन और अन्य तैयारियों का काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है।

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