बदायूं, संवाददाता।
उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन ने आशा एवं संगिनी कार्यकर्ताओं की विभिन्न समस्याओं और मांगों के समाधान को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष विमलेश कुमारी और जिलाध्यक्ष सुधा रानी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लखनऊ पर कई बार धरना-प्रदर्शन और अपनी समस्याओं को लेकर मांगें उठाई गईं, लेकिन अभी तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
ज्ञापन में कहा गया कि आंगनबाड़ी व पंचायत सहायकों के मानदेय में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन आशा एवं आशा संगिनी के मानदेय को लेकर अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। यूनियन ने जल्द समस्याओं का समाधान कराने की मांग की।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि संगिनी माह में 24 आशाओं पर 24 दिन कार्य करती हैं, इसलिए उनका कार्य बढ़ाकर 30 दिन का मानदेय दिया जाए। 40 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सुपरविजन करने वाली संगिनियों को ₹700 प्रति विजिट के बजाय ₹300 प्रति विजिट दिए जाने की व्यवस्था में संशोधन किया जाए। आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए 20 प्रतिशत मानदेय बढ़ाकर ₹26 हजार मानदेय निश्चित किया जाए।
इसके अलावा किसी आशा या आशा संगिनी की मृत्यु होने पर आश्रितों को नौकरी और 10 लाख रुपये की वार्षिक सहायता देने, पेमेंट में कटौती होने पर संबंधित संगिनी को लिखित सूचना देने, मोबाइल रिचार्ज के लिए आशा संगिनी को ₹250 के बजाय ₹350 देने, आशाओं के कार्य की समय सीमा निर्धारित कर ₹21 हजार मानदेय निश्चित करने, ई-कवच पर कार्य करने के लिए आशाओं व संगिनियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराने तथा सीएचसी-पीएचसी पर आशाओं के रुकने के लिए एक कमरा निर्धारित करने की मांग की गई।
यूनियन ने सीएमओ से सभी मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की। ज्ञापन में जिला उपाध्यक्ष मालती, जिला कोषाध्यक्ष कल्पना, जिला महामंत्री गीता पाठक, जिला संगठन मंत्री पद्मिनी, जिला महासचिव किरन, जिला सचिव चन्द्रवती और जिला सूचना प्रभारी सुशीला समेत पदाधिकारियों के नाम दर्ज हैं।

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