नया बदायूं लखनऊ। राज्य ब्यूरो
उत्तर प्रदेश में राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा के बाद राजस्व परिषद ने लापरवाही और मामलों के धीमे निस्तारण के आरोप में चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
शुक्रवार को सरकार की इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। निलंबित किए गए सभी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। शासन स्तर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लंबित मामलों पर सरकार की नजर
राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की संख्या को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के दौरान मामलों के निस्तारण की गति और अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन किया गया। जिन अधिकारियों के स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं मिली, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
सरकार का जोर पुराने और लंबे समय से लंबित राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण पर है, ताकि भूमि विवाद और अन्य राजस्व मामलों में लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
आगे भी हो सकती है कार्रवाई
राजस्व परिषद की ओर से अधिकारियों को लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। शासन स्तर पर आगे भी राजस्व न्यायालयों की नियमित समीक्षा किए जाने की तैयारी है। अधिकारियों के कामकाज में लापरवाही या मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी सामने आने पर इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने के संकेत दिए गए हैं।
सरकार की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे तहसील स्तर पर लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।

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